Tata Sons और Shapoorji Pallonji (SP) Group अपने लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इस चर्चा में 'शेयर स्वैप' का विकल्प मुख्य है, जो SP Group को सितंबर **2026** तक **₹3,500 करोड़** का कर्ज चुकाने में मदद कर सकता है।
विवाद खत्म करने की कवायद
टाटा संस और शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के बीच 18.4% हिस्सेदारी को लेकर छिड़ी जंग अब निर्णायक मोड़ पर है। बातचीत के दौरान एक संभावित 'शेयर स्वैप' फॉर्मूले पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत, SP ग्रुप टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी छोड़ने के बदले टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों, जैसे Tata Power के शेयर हासिल कर सकता है।
लिक्विडिटी का दबाव और कर्ज
इस बातचीत की सबसे बड़ी वजह SP ग्रुप की नकदी की जरूरत है। ग्रुप पर कुल ₹60,000 करोड़ के कर्ज का अनुमान है। सितंबर 2026 तक उन्हें ₹3,500 करोड़ का बड़ा कर्ज भुगतान करना है, जिसके लिए उन्हें अपने निवेश का मुद्रीकरण (Monetization) करना जरूरी लग रहा है।
रेगुलेटरी चुनौतियां
RBI ने टाटा संस को 'Upper Layer' NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है, जिससे कंपनी पर सख्त गवर्नेंस और भविष्य में लिस्टिंग का दबाव बढ़ गया है। स्ट्रक्चर को सरल बनाकर टाटा ग्रुप इन रेगुलेटरी अपेक्षाओं को बेहतर ढंग से पूरा कर सकता है। हालांकि, टाटा संस का वैल्युएशन तय करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें Air India और Tata Electronics जैसी नई और बड़ी कंपनियां शामिल हैं। N. Chandrasekaran के फरवरी 2027 में पद छोड़ने से पहले, ग्रुप इस मामले को पूरी तरह सुलझाना चाहता है।
