Tata Capital अब रिटेल और स्मॉल बिजनेस (SME) ग्राहकों पर फोकस कर रही है। कंपनी का इरादा इस साल **23-25%** की ग्रोथ हासिल करने का है, साथ ही होलसेल पोर्टफोलियो को घटाकर रिस्क को कम किया जा रहा है।
रिटेल पर बढ़ा भरोसा
Tata Capital अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। कंपनी अब अपनी कुल एसेट्स का 85-87% हिस्सा रिटेल और SME सेगमेंट से जुटाना चाहती है, जबकि होलसेल लोन बुक को घटाकर 13-15% पर लाने की तैयारी है। मैनेजमेंट का मानना है कि टू-व्हीलर लोन की बढ़ती मांग और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में रिकवरी से उन्हें अपनी ग्रोथ को गति देने में मदद मिलेगी। कंपनी फिलहाल बड़ी खरीदारी के बजाय ऑर्गेनिक ग्रोथ पर जोर दे रही है ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
रेगुलेटरी चुनौतियां और मार्जिन का दबाव
बढ़ती ब्याज दरों के कारण पूरे सेक्टर के मुनाफे पर दबाव है। हालांकि कंपनी की दो-तिहाई एसेट्स फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट से जुड़ी हैं, लेकिन रेपो-लिंक्ड लोन होने की वजह से ब्याज दरों के बदलावों का असर उन पर पड़ता है।
दूसरी तरफ, Reserve Bank of India (RBI) रिवॉल्विंग क्रेडिट और फ्लेक्सिबल लोन के लिए नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। यह सेक्टर के लिए एक बड़ा मुद्दा है। कंपनी इस बात को लेकर सतर्क है कि अगर नियम बहुत सख्त हुए, तो कर्ज लेने वालों के लिए लिक्विडिटी का संकट हो सकता है। टाटा कैपिटल इसे करीब से देख रही है और उम्मीद जता रही है कि फाइनल गाइडलाइन्स शुरुआती ड्राफ्ट से अलग हो सकती हैं।
लक्ष्य और एसेट क्वालिटी
कॉम्पिटिटिव मार्केट के बावजूद कंपनी का लक्ष्य 17-18% का Return on Equity और 2.5 से 2.7% का Return on Assets हासिल करना है। कंपनी की क्रेडिट कॉस्ट (बैड लोन के लिए रखा गया फंड) 1% के नीचे रहने की उम्मीद है, जो एसेट क्वालिटी को मजबूत बनाए रखने का संकेत है। निवेशकों की नजर अब RBI की फाइनल गाइडलाइन्स और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट की रिकवरी पर टिकी होगी।
