Tata Capital का कमाल! RBI के प्रस्ताव पर कंपनी का बड़ा खुलासा, 5% से कम है रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tata Capital का कमाल! RBI के प्रस्ताव पर कंपनी का बड़ा खुलासा, 5% से कम है रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर

RBI के रिवॉल्विंग क्रेडिट (Revolving Credit) को लेकर आए ड्राफ्ट प्रस्ताव के बाद, Tata Capital ने बड़ा खुलासा किया है। कंपनी ने बताया कि NBFCs के लिए इन फ्लेक्सी-लोन (Flexi-loan) प्रोडक्ट्स पर रोक लगाने के RBI के प्रस्ताव के बाद, Tata Capital का रिवॉल्विंग क्रेडिट एक्सपोजर (Revolving Credit Exposure) उसके कुल लोन बुक (Loan Book) के **5%** से भी काफी कम है।

RBI का बड़ा कदम: क्या होगा NBFCs का?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। RBI ने एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत NBFCs को रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स, जिन्हें फ्लेक्सी-लोन्स भी कहा जाता है, की पेशकश करने से रोका जा सकता है। ये ऐसे लोन होते हैं जिनमें बरोअर्स एक ही क्रेडिट लाइन से बार-बार पैसे निकाल और चुका सकते हैं। RBI चाहता है कि इनकी जगह फिक्स्ड रीपेमेंट शेड्यूल (Fixed Repayment Schedule) वाले स्ट्रिक्ट टर्म लोंस (Strict Term Loans) लागू हों।

Tata Capital को कितना होगा असर?

इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद, Tata Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, राजीव सभरवाल (Rajiv Sabharwal) ने स्पष्ट किया है कि कंपनी का ऐसे रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी (Revolving Credit Facility) में एक्सपोजर बहुत कम है। यह उनके कुल लोन बुक का 5% से भी कम है। जून के अंत तक, कंपनी की ग्रॉस लोन बुक करीब ₹2.86 ट्रिलियन थी, और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management) ₹2.90 ट्रिलियन थे। इसका मतलब है कि RBI के प्रस्तावित नियमों का कंपनी के मौजूदा बिजनेस मॉडल पर सीधा असर सीमित रहेगा।

'एवरग्रीनिंग' पर RBI की नजर

RBI की मुख्य चिंता 'एवरग्रीनिंग' (Evergreening) है। यह एक ऐसी प्रैक्टिस है जहां बरोअर्स मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए नए लोन निकालते हैं, जिससे लोन की असल क्वालिटी छिप जाती है। फ्लेक्सी-लोन पर रोक लगाकर, केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि NBFCs के पास अपने बरोअर्स के कैश फ्लो (Cash Flow) की बेहतर जानकारी हो, न कि ऐसे प्रोडक्ट्स पर निर्भर रहें जो चुकाने की क्षमता को अस्पष्ट कर सकते हैं। हालांकि, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और बुलेट रीपेमेंट लोन (Bullet Repayment Loans) इस प्रस्तावित बदलाव से बाहर रखे गए हैं।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

विश्लेषकों का मानना है कि इन नियमों का NBFC सेक्टर पर असर अलग-अलग होगा। जिन कंपनियों के पोर्टफोलियो में फ्लेक्सी-लोन प्रोडक्ट्स का हिस्सा ज्यादा है, उन्हें अपनी क्रेडिट पेशकशों को फिर से डिजाइन करने या मौजूदा ग्राहकों को पारंपरिक टर्म लोन स्ट्रक्चर (Term Loan Structure) में माइग्रेट करने का दबाव झेलना पड़ सकता है। कुछ मार्केट एनालिस्ट्स (Market Analysts) के अनुसार, Bajaj Finance जैसे नामों में इसका एक्सपोजर 15% से 20% तक हो सकता है। वहीं, Cholamandalam Investment and Finance, L&T Finance, और Poonawalla Fincorp जैसी बड़ी लेंडिंग कंपनियों पर इसका असर नगण्य रहने की उम्मीद है।

आगे क्या?

यह रेगुलेटरी प्रोसेस (Regulatory Process) अभी फीडबैक स्टेज (Feedback Stage) में है। RBI ने 28 अगस्त, 2026 तक हितधारकों और उद्योग निकायों से कमेंट्स मांगे हैं। फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (FIDC) जैसे उद्योग संगठन, रेगुलेटर के साथ फ्लेक्सी-लोन से दूर जाने की ऑपरेशनल चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। अंतिम नियम लागू होने के बाद ही सेक्टर पर इसका पूरा असर पता चलेगा, खासकर यह कि किसी ट्रांजिशन पीरियड (Transition Period) के दौरान मौजूदा लोन बुक्स (Loan Books) के साथ क्या होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.