Tata Capital ने अपने निवेशकों को बड़ी खुशखबरी दी है। कंपनी ने FY26 के लिए **₹0.57** प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Final Dividend) घोषित किया है। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले **33.59%** बढ़कर **₹4,886.05 करोड़** हो गया है।
Detailed Coverage
डिविडेंड का ऐलान और भुगतान की तारीख
Tata Capital Limited ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ) के लिए ₹0.57 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है। कंपनी के ₹10 फेस वैल्यू वाले शेयर पर यह 5.7% का रिटर्न होगा। कंपनी ने 27 जुलाई 2026 को एक्स-डिविडेंड (Ex-Dividend) और पेमेंट की तारीख तय की है। इसका मतलब है कि इस तारीख तक शेयर रखने वाले निवेशक इस डिविडेंड के हकदार होंगे।
जोरदार फाइनेंशियल ग्रोथ ने बढ़ाई डिविडेंड की रकम
यह डिविडेंड का ऐलान नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के लिए एक मजबूत वित्तीय वर्ष का संकेत देता है। Tata Capital ने FY26 के लिए ₹4,886.05 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो FY25 के ₹3,657.60 करोड़ के प्रॉफिट से 33.59% ज्यादा है। कंपनी के रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जो FY26 में बढ़कर ₹31,539.89 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल यह ₹28,312.74 करोड़ था।
पूरे साल ग्रोथ स्थिर रही। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुई चौथी तिमाही में, कंपनी के नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 46.34% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,465.29 करोड़ रहा। इसी तिमाही में रेवेन्यू 9.12% बढ़कर ₹8,160.10 करोड़ हो गया। यह दिखाता है कि लेंडिंग सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी ने अपना बिजनेस मोमेंटम बनाए रखा।
डिविडेंड का बढ़ता ट्रेंड और निवेशक
इस साल का डिविडेंड पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी ज्यादा है। FY25 में कंपनी ने ₹0.21 प्रति शेयर और FY24 में ₹0.20 प्रति शेयर का डिविडेंड दिया था। FY23 में कोई डिविडेंड नहीं दिया गया था। मौजूदा बाजार भाव के हिसाब से डिविडेंड यील्ड (Dividend Yield) भले ही लगभग 0.17% हो, लेकिन डिविडेंड प्रति शेयर में लगातार बढ़ोतरी कंपनी के बेहतर कैश फ्लो जनरेशन और वित्तीय सेहत को दर्शाती है।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी ब्याज दर के उतार-चढ़ाव और क्रेडिट डिमांड के प्रति संवेदनशील सेक्टर में काम करती है। FY26 में प्रॉफिट ग्रोथ मजबूत रही है, लेकिन भविष्य में डिविडेंड का भुगतान कंपनी की क्रेडिट क्वालिटी बनाए रखने और बदलते मैक्रो इकोनॉमिक माहौल में फंड की लागत को मैनेज करने की क्षमता पर निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए आगे चलकर कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) के मेट्रिक्स, खासकर नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net Non-Performing Assets) पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये लोन बुक के जोखिम स्तर को दर्शाते हैं। इसके अलावा, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों के लिए किसी भी नियामक दिशानिर्देश में बदलाव भविष्य की कैपिटल एलोकेशन स्ट्रैटेजी, जिसमें डिविडेंड वितरण भी शामिल है, को प्रभावित कर सकता है।
