Quick Commerce का दौर खत्म? TVS Capital के गोपाल श्रीनिवासन ने निवेशकों को दी बड़ी चेतावनी

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Quick Commerce का दौर खत्म? TVS Capital के गोपाल श्रीनिवासन ने निवेशकों को दी बड़ी चेतावनी

TVS Capital Funds के चेयरमैन गोपाल श्रीनिवासन ने निवेशकों को नई राह दिखाई है। उन्होंने साफ कर दिया है कि भारी कैश बर्न करने वाले क्विक कॉमर्स मॉडल का दौर अब बीत रहा है और अब पैसा टेक-लेड मैन्युफैक्चरिंग में लगाने का समय है।

TVS Capital Funds के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर गोपाल श्रीनिवासन ने भारतीय प्राइवेट इक्विटी बाजार में एक बड़ा बदलाव आने का संकेत दिया है। लगभग 50 अरब रुपये का पोर्टफोलियो संभालने वाले श्रीनिवासन का मानना है कि क्विक कॉमर्स कंपनियों में अंधाधुंध फंडिंग का दौर अब समाप्त हो रहा है। उन्होंने इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये केवल भारी कैश बर्न और वेंचर कैपिटल पर निर्भर हैं, न कि सस्टेनेबल मुनाफे पर।

क्विक कॉमर्स की चुनौती

श्रीनिवासन के अनुसार, क्विक कॉमर्स मॉडल में लेबर कॉस्ट और लॉजिस्टिक की जटिलता इतनी ज्यादा है कि इसे बिना ऑटोमेशन या रोबोटिक्स के स्केल करना नामुमकिन है। निवेशकों के लिए अब ऐसी कंपनियां कम आकर्षक हो गई हैं जो लंबे समय तक टिकने वाले औद्योगिक लाभ (Industrial Advantages) पैदा नहीं कर पा रही हैं।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दांव

अब टीवीएस कैपिटल का ध्यान टेक-लेड मैन्युफैक्चरिंग की ओर है। इसमें एयरोस्पेस, डिफेंस सप्लाई चेन, डेटा सेंटर हार्डवेयर और पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये सेक्टर कंज्यूमर प्लेटफॉर्म्स के उलट अपनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के दम पर काम करते हैं, जो निवेशकों के लिए जोखिम और रिवॉर्ड का बेहतर संतुलन पेश करते हैं।

फाइनेंशियल सर्विसेज में वैल्युएशन का दौर

श्रीनिवासन ने यह भी बताया कि फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में एक जरूरी 'वैल्युएशन करेक्शन' हो रहा है। 2022 के मुकाबले इस सेक्टर में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल का निवेश आधा रह गया है। हालांकि, वेल्थ मैनेजमेंट अभी भी एक अपवाद बना हुआ है और यहां लगातार पूंजी आ रही है।

'रुपया कैपिटल' का बढ़ता दबदबा

अब भारतीय बाजार विदेशी निवेश पर निर्भरता कम कर रहा है। घरेलू 'रुपया कैपिटल' का महत्व बढ़ रहा है और PFRDA (पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा वैकल्पिक निवेश के रास्ते खोलने से डीप-टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अब स्थिर लिक्विडिटी मिलेगी। आने वाले समय में वही कंपनियां सफल होंगी जो 'ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट' के बजाय ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर जोर देंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.