अब छोटे कारोबारियों के लिए कर्ज लेना आसान होगा। TReDS प्लेटफॉर्म्स ने सरकारी गारंटी स्कीम CGTMSE को अपने साथ जोड़ लिया है, जिससे लेंडर्स का रिस्क कम होगा और MSMEs को सस्ती दरों पर नकदी मिल सकेगी। M1xchange ने इस नई व्यवस्था के तहत अपना पहला ट्रांजेक्शन भी पूरा कर लिया है।
क्या है नया बदलाव?
सरकार के इस फैसले से MSMEs के लिए क्रेडिट तक पहुंच आसान हो गई है। अब TReDS प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को सरकार की ओर से आंशिक गारंटी (Partial Guarantee) मिलेगी। अगर कोई कॉर्पोरेट बायर समय पर पेमेंट नहीं करता है, तो यह गारंटी लेंडर्स के लिए एक 'सेफ्टी नेट' का काम करेगी। अब तक, पेमेंट न मिलने के डर से बैंक इनवॉइस डिस्काउंटिंग से बचते थे, लेकिन अब यह जोखिम कम हो गया है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
पारंपरिक रूप से MSMEs के पास क्रेडिट हिस्ट्री कम होती है, जिसके चलते उन्हें कर्ज मिलना मुश्किल होता था। अब TReDS प्लेटफॉर्म पर CGTMSE के जुड़ने से लेंडर्स का भरोसा बढ़ा है। M1xchange ने सफलतापूर्वक इस गारंटी सिस्टम के साथ अपना पहला ट्रांजेक्शन भी पूरा कर लिया है।
MSMEs को क्या होगा फायदा?
बड़ी कंपनियों से पेमेंट मिलने में देरी के कारण छोटे कारोबारियों का कैश फ्लो अक्सर अटक जाता है। इस नई सुविधा से उन्हें अपनी इनवॉइस के बदले तुरंत नकदी मिलेगी, जिससे उनके बिजनेस का संचालन सुचारू रहेगा। साथ ही, लेंडर्स के बीच कॉम्पिटिशन बढ़ने से उधार लेने की लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।
आरबीआई (RBI) और सरकार का फोकस
आरबीआई का लक्ष्य MSME सप्लाई चेन को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है। Ministry of MSME का मानना है कि इस कदम से न केवल छोटे फर्मों को औपचारिक क्रेडिट मार्केट में जगह मिलेगी, बल्कि उन्हें हाई रिस्क कैटेगरी से बाहर निकालने में भी मदद मिलेगी। अब पूरी नजर इस बात पर है कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंक इस व्यवस्था को कितनी तेजी से अपनाते हैं।
