Aseem Infra Finance में बड़ी हिस्सेदारी खरीदेगा TPG कंसोर्टियम, GIC और ICICI Bank भी साथ

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Aseem Infra Finance में बड़ी हिस्सेदारी खरीदेगा TPG कंसोर्टियम, GIC और ICICI Bank भी साथ

TPG के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम ने Aseem Infrastructure Finance में **100%** हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक एग्रीमेंट साइन किया है। इस डील से NBFC का स्वामित्व बदलेगा, जो सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर डेट पर फोकस करती है।

इंफ्रा फाइनेंसिंग में बड़ा बदलाव

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फर्म TPG के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने Aseem Infrastructure Finance Limited में 100% हिस्सेदारी खरीदने का ऐलान किया है। इस खरीदारी ग्रुप में सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड GIC और भारत के बड़े बैंक ICICI Bank जैसे खास पार्टनर भी शामिल हैं। यह डील मौजूदा शेयरधारकों, जिनमें नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II (NIIF II), सुमितोमो मिтуи बैंकिंग कॉर्पोरेशन और भारत सरकार शामिल हैं, से पूरी हिस्सेदारी खरीदने के तहत की जा रही है।

सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

NIIF द्वारा 2020 में स्थापित Aseem Infrastructure Finance, एक स्पेशलाइज्ड नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को डेट फाइनेंसिंग मुहैया कराती है। कंपनी ने सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स की फंडिंग में अहम भूमिका निभाई है, और रिन्यूएबल एनर्जी और पावर ट्रांसमिशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ₹40,000 करोड़ से अधिक का लोन दिया है। TPG के लिए, यह एक्वीजीशन उसके ग्लोबल साउथ इनिशिएटिव के तहत आता है, जिसका मकसद क्लाइमेट फाइनेंस और ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है। GIC और ICICI Bank जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर, कंसोर्टियम का लक्ष्य भारत में लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने के लिए NBFC की क्षमता को मजबूत करना है।

डील और कानूनी पहलू

इस जटिल मालिकाना हक ट्रांसफर को मैनेज करने के लिए कई बड़ी लॉ फर्म्स शामिल थीं। Cyril Amarchand Mangaldas ने TPG को फंडरेज़िंग और स्ट्रक्चरल पहलुओं पर सलाह दी, वहीं इंटरनेशनल फर्म Linklaters ने TPG और GIC को लीगल गाइडेंस दी। सेलर्स की तरफ से, Trilegal ने Aseem Infrastructure Finance को लीगल एडवाइजरी दी, जबकि Shardul Amarchand Mangaldas & Co ने NIIF II के हितों का प्रतिनिधित्व किया। इतने बड़े संस्थानों और लीगल एडवाइजर्स की भागीदारी भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग स्पेस में इस बायआउट के पैमाने और जटिलता को दर्शाती है।

आगे क्या देखें?

मार्केट ऑब्जर्वर्स के लिए, मुख्य फोकस ट्रांजिशन प्रोसेस पर रहेगा और यह देखना होगा कि नया ओनरशिप स्ट्रक्चर कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और उधार की लागत को कैसे प्रभावित करता है। Aseem Infrastructure Finance एक ऐसे सेगमेंट में काम करती है जहां लोन बुक की क्वालिटी और हेल्दी इंटरेस्ट मार्जिन बनाए रखने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होती है। निवेशकों की नजर कंपनी की कैपिटल एडिक्वेसी और TPG-लेड प्लेटफॉर्म में इंटीग्रेट होने के साथ-साथ उसके लेंडिंग पोर्टफोलियो में किसी भी बदलाव पर रहेगी। इसके अलावा, आने वाली तिमाहियों में लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए नए मालिकों की तरफ से सस्टेन्ड लिक्विडिटी प्रदान करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।

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