दमदार नतीजे और एसेट क्वालिटी में सुधार
TFCILTD ने Q4 FY26 और पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए दमदार वित्तीय नतीजे और एसेट क्वालिटी में सुधार की घोषणा की है। कंपनी के नतीजों के अनुसार, Q4 FY26 में नेट प्रॉफिट 6% बढ़कर ₹32.02 करोड़ रहा, जबकि रेवेन्यू 8.6% बढ़कर ₹73.89 करोड़ दर्ज किया गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए, कंपनी ने ₹123.46 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 18.9% ज़्यादा है। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 8.8% बढ़कर ₹273.69 करोड़ रहा।
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी की एसेट क्वालिटी में ज़बरदस्त सुधार हुआ है। मार्च 2026 के अंत तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 0.37% पर आ गए, जो पिछले साल 3.22% थे। इसके चलते नेट NPAs अब नील (Nil) हो गए हैं, और प्रोविज़न कवरेज रेशियो 100% पर मजबूती से टिका है।
डिविडेंड और कैपिटल रेज़ की योजना
TFCILTD के बोर्ड ने FY26 के लिए ₹0.60 प्रति इक्विटी शेयर का डिविडेंड (Dividend) भी रिकमेंड किया है। इसके अलावा, कंपनी ₹1,200 करोड़ तक की कैपिटल रेज़ (Capital Raise) की भी योजना बना रही है, जो बैलेंस शीट को मज़बूत करने या रणनीतिक पहलों के लिए हो सकता है। इस कैपिटल रेज़ से कंपनी का लीवरेज (Leverage) बढ़ेगा, जो मौजूदा ब्याज दरों और साइक्लिकल (Cyclical) बिज़नेस के चलते थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है।
वैल्यूएशन पर चिंता
हालांकि, इन शानदार नतीजों के बावजूद, निवेशकों की नज़र TFCILTD के वैल्यूएशन (Valuation) पर भी टिकी हुई है। कंपनी का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) करीब 28-30x है, जो इसके मुकाबलेदारों जैसे Power Finance Corporation (PFC) और Rural Electrification Corporation (REC) के 11-12x P/E से काफी ज़्यादा है। PNB Housing Finance भी लगभग 11-12x के P/E पर ट्रेड कर रहा है। कंपनी के पिछले एक साल के शेयर प्रदर्शन की बात करें तो इसमें 80.82% की तेज़ी देखी गई है, जो शायद इसी वैल्यूएशन को सपोर्ट कर रही है। लेकिन, 8-9% की सालाना सेल्स ग्रोथ के हिसाब से यह प्रीमियम वैल्यूएशन कितना टिकाऊ होगा, यह देखना बाकी है।
एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में Anoop Bali को मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) के तौर पर दो साल के लिए फिर से नियुक्त किया गया है, जो लीडरशिप में स्थिरता लाता है। यह कदम, ₹1,200 करोड़ के फंड जुटाने की योजना के साथ मिलकर, कंपनी की भविष्य की रणनीतियों को दर्शाता है, लेकिन यह भी सवाल उठता है कि क्या कंपनी अपनी ऊंची वैल्यूएशन को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त ग्रोथ हासिल कर पाएगी।