Supreme Housing: प्रमोटरों ने चुकाए ₹200 करोड़, ₹518 करोड़ की डील से कंपनी दिवालिया होने से बची!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Supreme Housing: प्रमोटरों ने चुकाए ₹200 करोड़, ₹518 करोड़ की डील से कंपनी दिवालिया होने से बची!

Supreme Housing and Hospitality के प्रमोटरों ने **₹518 करोड़** के वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) प्लान के तहत **₹200 करोड़** जमा कर दिए हैं। इस कदम से कंपनी पर कुल **₹648 करोड़** का बकाया कर्ज चुकाने में मदद मिलेगी और यह दिवालियापन की कार्यवाही से बाहर निकल सकती है।

Supreme Housing and Hospitality अपनी कर्ज की समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रही है। कंपनी के प्रमोटरों ने एक खास अकाउंट में ₹200 करोड़ की रकम जमा की है। यह ₹518 करोड़ के सेटलमेंट प्लान का एक अहम हिस्सा है, जिसका मकसद कंपनी पर कुल ₹648 करोड़ के कर्ज को निपटाना है। कंपनी फिलहाल दिवालियापन की कार्यवाही (insolvency proceedings) के दौर से गुजर रही है, जो तब होती है जब कोई कंपनी अपने कर्जों का भुगतान करने में असमर्थ होती है और यह प्रक्रिया रेगुलेटर्स की निगरानी में चलती है।

कर्ज सेटलमेंट और लेनदारों की रिकवरी

इस मामले में लीड लेंडर (lead lender) Canara Bank पर कंपनी का बड़ा कर्ज बकाया है। सेटलमेंट प्लान के अनुसार, Canara Bank को लगभग ₹475 करोड़ की रिकवरी होने का अनुमान है। बैंक का डेवलपर पर कुल ₹593 करोड़ का फंड-बेस्ड एक्सपोजर (fund-based exposure) था, ऐसे में यह सेटलमेंट उसके बकाए का लगभग 80% है। सेटलमेंट पैकेज की बाकी रकम ₹518 करोड़ में से अन्य चार लेनदारों के बीच बांटी जाएगी।

दिवालियापन प्रक्रिया और अगले कदम

Canara Bank ने मई में डेवलपर के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की थी। सेटलमेंट प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए इन कार्यवाहियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। हालांकि, इस प्लान को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए, इसे कम से कम 90% लेनदारों की मंजूरी मिलनी चाहिए। कंपनी को 28 जुलाई तक पूरा सेटलमेंट अमाउंट जमा करना है, और मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को तय है।

संभावित स्ट्रैटेजिक निवेश

खबरों के मुताबिक, इंदौर स्थित Kalyan Group इस कर्ज समाधान प्लान के लिए जरूरी पूंजी मुहैया करा सकता है। अगर यह निवेश होता है, तो कंपनी को बैंकों के साथ अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए जरूरी लिक्विडिटी (liquidity) मिल सकती है। जैसे-जैसे कंपनी 28 जुलाई की समय सीमा की ओर बढ़ रही है, निवेशकों के लिए मुख्य बातें यह होंगी कि क्या जरूरी 90% लेनदार की मंजूरी मिलती है और क्या सेटलमेंट राशि का शेष बैलेंस समय पर जमा होता है। ये डेवलपमेंट यह तय करने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि क्या कंपनी सफलतापूर्वक दिवालियापन प्रक्रिया से बाहर निकल पाएगी और सामान्य कामकाज फिर से शुरू कर पाएगी।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.