YES Bank: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ को किया रद्द

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
YES Bank: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ₹8,415 करोड़ के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने RBI और YES Bank की दलीलों को खारिज करते हुए साल 2020 में किए गए **₹8,415 करोड़** के AT1 बॉन्ड राइट-ऑफ को अवैध करार दिया है। इस फैसले से हजारों निवेशकों के पैसे वापस मिलने की उम्मीद जगी है।

ऐतिहासिक फैसला और निवेशकों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने YES Bank, RBI और केंद्र सरकार की उन चुनौतियों को खारिज कर दिया है, जिनमें AT1 बॉन्ड के राइट-ऑफ को सही ठहराया गया था। यह विवाद मार्च 2020 में बैंक के वित्तीय संकट के समय शुरू हुआ था। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब बैंक को इन बॉन्ड्स को फिर से अपनी लायबिलिटी (Liability) के तौर पर देखना होगा।

क्या था मामला?

साल 2020 में बैंक के पुनर्गठन (Reconstruction) के दौरान, नियामकों ने नुकसान की भरपाई के लिए इन बॉन्ड्स को पूरी तरह से राइट-डाउन कर दिया था। AT1 बॉन्ड एक जटिल और हाई-रिस्क डेट इंस्ट्रूमेंट होते हैं। कानूनी लड़ाई इस बात पर थी कि क्या उस समय की प्रक्रिया में नियमों का सही पालन हुआ था या नहीं। अब कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह राइट-ऑफ वैध नहीं था।

बैंक की बैलेंस शीट पर असर

यह फैसला बैंक के लिए एक नई वित्तीय चुनौती बनकर आया है। अब YES Bank को यह तय करना होगा कि इस पुराने डेट को वापस लाने का उसके कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) पर क्या असर पड़ेगा। बैंक को रेगुलेटर के साथ मिलकर इस बात पर चर्चा करनी होगी कि बॉन्डधारकों को भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी।

निवेशकों के लिए आगे क्या?

हजारों रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों, जिनमें कई म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने निवेश को जीरो मान लिया था, उनके लिए यह एक बड़ी कानूनी जीत है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि बैंक इस रीपेमेंट की प्रक्रिया को कैसे शुरू करता है और इसका बैंक की फाइनेंशियल सेहत पर आने वाली तिमाहियों में क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.