Sun Pharmaceutical Industries अपनी हालिया Organon & Co. डील के कर्ज को रिफाइनेंस करने के लिए **₹10,000 करोड़** का बॉन्ड इश्यू लाने की योजना बना रही है।
विदेशी कर्ज से मुक्ति का दांव
Sun Pharmaceutical Industries ने अपनी फाइनेंशियल स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव करते हुए लगभग ₹10,000 करोड़ जुटाने का ऐलान किया है। कंपनी इस राशि का उपयोग Organon & Co. के अधिग्रहण के दौरान लिए गए 'ब्रिज लोन' को चुकाने के लिए करेगी। डॉलर के मुकाबले रुपये में कर्ज लेने से कंपनी को अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी और ब्याज का बोझ भी कम होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अमेरिका में ऊंचे बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी मुद्रा में कर्ज लेना अब महंगा साबित हो रहा है। इसी के चलते बड़ी भारतीय कंपनियां अब घरेलू मार्केट की ओर रुख कर रही हैं ताकि करेंसी रिस्क को कम किया जा सके।
कौन होगा स्ट्रक्चरिंग में शामिल?
इस बॉन्ड इश्यू के लिए 2 से 4 साल की अवधि (tenor) तय की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, State Bank of India इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कंपनी का यह कदम उसके कैश फ्लो को बेहतर बनाने और कर्ज के भुगतान को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद करेगा।
निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बॉन्ड की फाइनल कूपन रेट क्या रहती है, जो कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और मार्केट लिक्विडिटी का सही आईना दिखाएगी।
