Bank of India Mutual Fund के CIO आलोक सिंह ने चेतावनी दी है कि डॉलर की मजबूती भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश (FPI) को सीमित रख सकती है। हालांकि, डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स के भरोसे बाजार फिलहाल संभला हुआ है।
बाजार पर डॉलर का दबाव
अमेरिकी डॉलर की मजबूती का सीधा असर उभरते हुए बाजारों, खासकर भारत पर पड़ रहा है। Bank of India Mutual Fund के CIO आलोक सिंह के अनुसार, ग्लोबल निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स की तरफ भाग रहे हैं, जिससे FPI का प्रवाह निकट भविष्य में सीमित रह सकता है। इसी वजह से मार्केट में फिलहाल एक सीमित दायरे (range-bound) में हलचल बनी रहेगी।
घरेलू निवेशकों से मिली ताकत
विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में गिरावट नहीं आ रही है, जिसकी मुख्य वजह स्थानीय संस्थागत निवेशक और रिटेल पार्टिसिपेंट्स हैं। ये निवेशक बाजार के लिए एक 'बफर' की तरह काम कर रहे हैं, जो वैल्युएशन को गिरने नहीं दे रहे हैं।
कॉरपोरेट और सेक्टर आउटलुक
उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनियों के मुनाफे पर चल रहा मौजूदा दबाव सिर्फ इसी फाइनेंशियल ईयर तक सीमित रह सकता है, और 2028 तक स्थिति सामान्य हो सकती है। हालांकि, केमिकल सेक्टर में फिलहाल सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि यहां अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं।
रेगुलेटरी और पॉलिसी अपडेट्स
IRDAI के नए प्रस्तावित फ्रेमवर्क से इंश्योरेंस सेक्टर में बदलाव की बयार है, जिससे कंपनियों के बिजनेस मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, RBI के मोर्चे पर महंगाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, हालांकि अक्टूबर की पॉलिसी मीटिंग में किसी भी तरह की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम है।
