अगर बैंक में रखा आपका गिरवी सोना चोरी हो जाता है, तो आपका लोन एग्रीमेंट अपने आप खत्म नहीं होता। हालांकि, बैंक सोने की कीमत के साथ-साथ मेकिंग चार्ज और पत्थरों (stones) की पूरी भरपाई करने के लिए जिम्मेदार हैं। जानें क्लेम करने का सही तरीका।
जब बैंक में गिरवी रखा सोना चोरी होता है, तो कई कर्जदार गलतफहमी में रहते हैं कि उनका लोन अपने आप माफ हो गया है। हकीकत में, लोन एग्रीमेंट एक कानूनी अनुबंध (binding contract) बना रहता है और सुरक्षा (security) चोरी होने से कर्ज चुकाने की आपकी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। भारतीय अनुबंध अधिनियम (Indian Contract Act) के तहत, बैंक एक 'बेली' (bailee) की भूमिका में होते हैं, यानी वे आपके गहनों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं। यदि चोरी बैंक की लापरवाही से होती है, तो बैंक को उस नुकसान की पूरी भरपाई करनी होगी।
मुआवजे का नियम क्या है?
जुलाई 2026 के उपभोक्ता आयोग (Consumer Commission) के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंक सिर्फ सोने के बाजार भाव देकर पल्ला नहीं झाड़ सकते। यदि चोरी हुए गहनों में नगीने या कीमती पत्थर थे, तो बैंक को सोने के वजन के अलावा मेकिंग चार्जेस और उन पत्थरों की पूरी कीमत का भुगतान भी करना होगा।
क्या दस्तावेज जरूरी हैं?
मुआवजा हासिल करने के लिए आपके पास पुख्ता डॉक्यूमेंट्स होने चाहिए:
- ओरिजिनल प्लेज रिसिप्ट (Pledge Receipt)
- वैल्यूएशन सर्टिफिकेट
- गहनों की लिस्ट
- खरीद का बिल या फोटो (यदि उपलब्ध हो)
लॉकर और गिरवी रखे सोने में अंतर
याद रखें, बैंक लॉकर और गिरवी रखे सोने के नियमों में बड़ा फर्क है। गिरवी रखा सोना एक 'सिक्योर्ड लोन' (Secured Loan) का हिस्सा है, जहां बैंक का खुद का वित्तीय हित (financial interest) शामिल है। इसलिए, लॉकर की तुलना में बैंक की जिम्मेदारी यहां कहीं ज्यादा होती है।
क्या करें अगर बैंक बात न सुने?
- सबसे पहले बैंक के इंटरनल ग्रीवेंस विभाग में लिखित शिकायत करें और रेफरेंस नंबर लें।
- समस्या हल न होने पर आप RBI की 'इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम' (Integrated Ombudsman Scheme) में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- पुलिस FIR की कॉपी, बैंक के साथ हुई पत्राचार और ओरिजिनल लोन डॉक्यूमेंट्स को संभाल कर रखें ताकि बैंक आपसे गलत तरीके से ब्याज न वसूल सके।
