Starteck Finance: नंबर्स में बहार, पर EPS में सवाल!
Starteck Finance Limited के कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल नतीजों पर नजर डालें तो तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में कंपनी का प्रदर्शन शानदार रहा। कुल इनकम (Total Income) में 65.09% का जबरदस्त उछाल आया और यह ₹1,566.19 लाख तक पहुंच गई। वहीं, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में तो जैसे बहार आ गई, जो 186.47% बढ़कर ₹747.71 लाख दर्ज किया गया। इसके चलते, अर्निंग्स पर शेयर (EPS) में भी 223.60% की जोरदार ₹7.54 की बढ़त देखने को मिली।
अगर नौ महीनों (9 Months FY26) के नतीजों को देखें, तो भी कंपनी ने दमदार ग्रोथ जारी रखी है। कुल इनकम 58.68% बढ़कर ₹4,201.18 लाख हुई, जबकि PAT में 142.65% की तेजी आई और यह ₹1,838.10 लाख पर पहुंच गया। नौ महीनों के लिए EPS भी 129.70% बढ़कर ₹18.55 रहा।
पिछली तिमाही से नरमी और बड़ी विसंगति!
लेकिन, जब हम पिछली तिमाही (QoQ) के आंकड़ों से तुलना करते हैं, तो कुछ नरमी नज़र आती है। कुल इनकम में 2.87% की मामूली गिरावट के साथ यह ₹1,566.19 लाख रही, और PAT भी 12.19% घटकर ₹747.71 लाख पर आ गया।
अब आते हैं उस बड़ी पेचीदगी पर जिसने निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। कंपनी ने स्टैंडअलोन आधार पर भी अपने नतीजे जारी किए हैं। दिलचस्प बात यह है कि तीसरी तिमाही (Q3 FY26) और नौ महीनों (9 Months FY26) के लिए स्टैंडअलोन EPS के आंकड़े पिछले साल के समान ही ₹6.70 और ₹18.55 बताए गए हैं। यह आंकड़ा बेहद हैरान करने वाला है, खासकर तब, जब कंपनी ने स्टैंडअलोन PAT में बढ़ोतरी दर्ज की है (उदाहरण के लिए, Q3 स्टैंडअलोन PAT ₹573.52 लाख से बढ़कर ₹648.13 लाख हुआ)। PAT बढ़ने के बावजूद EPS का एक जैसा रहना, नंबरों की गणना पद्धति या जारी शेयरों की संख्या में हुए किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर सकता है, जिस पर मैनेजमेंट से तत्काल स्पष्टीकरण की ज़रूरत है।
प्रॉफिट मार्जिन में सुधार और आगे की राह
यह देखना भी ज़रूरी है कि PAT में हुई यह जोरदार बढ़ोतरी, रेवेन्यू की बढ़ोतरी से काफी ज़्यादा है, जो दर्शाता है कि कंपनी की प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ है। कंपनी एक ही मुख्य एक्टिविटी में काम करती है, इसलिए कोई सेगमेंट-स्पेशल रिपोर्टिंग नहीं है और इन अवधियों के लिए कोई एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Items) भी दर्ज नहीं किए गए हैं।
इस पूरी तस्वीर में सबसे बड़ा जोखिम स्टैंडअलोन EPS के आंकड़ों में मौजूद अनसुलझी विसंगति ही है, जो रिपोर्टिंग में समस्या या पारदर्शिता की कमी का संकेत दे सकती है। तिमाही दर तिमाही (QoQ) प्रदर्शन में आई नरमी, बाज़ार के अल्पकालिक दबाव या संचालन संबंधी चुनौतियों को दिखा सकती है। इसके अलावा, मैनेजमेंट की ओर से भविष्य की कोई गाइडेंस (Guidance) न मिलना, निवेशकों को कंपनी की ग्रोथ की दिशा को लेकर अनिश्चितता में डाल रहा है। ऐसे में, निवेशकों को चाहिए कि वे मैनेजमेंट से EPS विसंगति को लेकर आगे आने वाले किसी भी स्पष्टीकरण या जानकारी पर पैनी नज़र रखें।
