National Housing Bank (NHB) ने फॉरेंसिक ऑडिट के बाद Star Housing Finance के रिफाइनेंस अकाउंट को 'Fraud' घोषित कर दिया है। फर्जी लोन और वित्तीय गड़बड़ी के खुलासे के बाद कंपनी भारी लिक्विडिटी संकट और डिफ़ॉल्ट का सामना कर रही है।
फॉरेंसिक ऑडिट में हुआ बड़ा खुलासा
NHB की यह सख्त कार्रवाई Ravi Rajan & Co LLP द्वारा किए गए फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट के बाद आई है। जांच में 'फैंटम' (फर्जी) लोन अकाउंट्स का जाल बिछा हुआ मिला। ये वो लोन थे जो कागजों पर तो थे, लेकिन हकीकत में उनका कोई अस्तित्व नहीं था। ऑडिट के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल फंड की हेराफेरी, शेयर प्राइस में हेरफेर और कर्मचारियों को असुरक्षित लोन देने के लिए किया गया। अप्रैल 2026 में कंपनी ने खुद ₹120 करोड़ के संदिग्ध लोन बुक की बात स्वीकार की थी।
डिफ़ॉल्ट की कगार पर कंपनी
इन खुलासों का सीधा असर कंपनी की साख पर पड़ा है। India Ratings & Research ने कंपनी की डेट इंस्ट्रूमेंट्स और बैंक लोन फैसिलिटीज को घटाकर 'IND D' कर दिया है। इसका साफ मतलब है कि कंपनी अब डिफ़ॉल्ट की स्थिति में है। साथ ही, एक ही कोलेटरल को कई लेंडर्स के पास गिरवी रखने की खबरों ने कर्जदाताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
मालिकाना हक बदलने की तैयारी
इस संकट के बीच Star Housing Finance अब कंपनी के मालिकाना हक में बदलाव की कोशिश कर रही है। प्रमोटर्स आशीष जैन, कविश जैन, निर्मल कुमार जैन और सबसे बड़े शेयरहोल्डर अनिल सचिदानंद अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए संभावित निवेशकों से बातचीत कर रहे हैं। इसका मकसद बैलेंस शीट में नई पूंजी डालकर कंपनी को बचाना है।
हालांकि, कंपनी में नेतृत्व का संकट भी गहराया हुआ है। हाल ही में CEO और CFO जैसे बड़े पदों से इस्तीफे हुए हैं। पिछले एक साल में शेयर में 76% से ज्यादा की गिरावट आई है, और अब निवेशकों की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या नया मैनेजमेंट इस डूबती हुई कंपनी को बचाने में कामयाब होगा या नहीं।
