डिजिटल लेंडर अक्सर ऐसे हथकंडे अपनाते हैं जो आपको कर्ज के जाल और डेटा चोरी में फंसा सकते हैं। RBI की आधिकारिक डिजिटल लेंडिंग डायरेक्टरी और ऐप परमिशंस की जांच करके आप सुरक्षित रह सकते हैं।
भारत में डिजिटल लेंडिंग का दायरा तेजी से बढ़ा है, जिससे लोन लेना आसान तो हुआ है, लेकिन इसी के साथ फर्जी ऐप्स का खतरा भी बढ़ गया है। ये ऐप्स दिखने में प्रोफेशनल होते हैं, लेकिन इनके पीछे का मकसद आपको कर्ज के जाल में फंसाना होता है।\n\n### RBI का वेरिफिकेशन टूल\n\nइन फर्जी ऐप्स पर लगाम लगाने के लिए RBI ने 1 जुलाई, 2025 को डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLAs) की एक डेडिकेटेड डायरेक्टरी जारी की है। अगर आप लोन लेने जा रहे हैं, तो सबसे पहले इस लिस्ट में ऐप का नाम जरूर चेक करें। अगर ऐप इस लिस्ट में नहीं है, तो समझ लीजिए कि वह RBI के दायरे से बाहर है और आपके लिए बड़ा रिस्क हो सकता है।\n\n### कैसे पहचानें खतरे के संकेत?\n\nकिसी भी फाइनेंशियल ऐप को इंस्टॉल करने से पहले उसके परमिशंस (Permissions) पर ध्यान दें। अगर कोई ऐप आपसे आपकी पर्सनल कॉन्टैक्ट लिस्ट, कॉल लॉग्स या फोटो गैलरी का एक्सेस मांग रहा है, तो सावधान हो जाएं। ये ऐप्स इसी डेटा का इस्तेमाल वसूली के लिए दबाव बनाने या आपके करीबियों को परेशान करने में करते हैं।\n\n### लागत और रेगुलेटरी नियम\n\nRBI के नियमों के अनुसार, हर रेगुलेटेड लेंडर को एक 'वन-पेज फैक्ट शीट' देना अनिवार्य है, जिसमें APR और सभी चार्ज साफ लिखे हों। देश में हाउसहोल्ड डेट (Household Debt) जीडीपी का 48% के करीब पहुंच गया है, जिसका फायदा उठाकर ये ऐप्स छुपे हुए चार्जेस के जरिए ग्राहकों को लूटते हैं।\n\n### सरकारी कार्रवाई और सतर्कता\n\nMeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) IT एक्ट की धारा 69A के तहत ऐसे खतरनाक ऐप्स को लगातार ब्लॉक कर रहा है। हालांकि, तकनीकी मदद के साथ-साथ आपकी सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें और सभी नियम-शर्तें लिखित में पढ़ें।
