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South Indian Banks Share Price: कर्ज बांटने में बंपर तेजी! डिपॉजिट्स की ग्रोथ पीछे छूटी

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
South Indian Banks Share Price: कर्ज बांटने में बंपर तेजी! डिपॉजिट्स की ग्रोथ पीछे छूटी
Overview

साउथ इंडियन बैंकों के लिए Q4FY24 के नतीजे खास रहे। Indian Bank, South Indian Bank, Karur Vysya Bank, Karnataka Bank और Tamilnad Mercantile Bank, इन सभी ने दिखाया कि उनका ग्रॉस लोन ग्रोथ (Gross Loan Growth) डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) से काफी आगे निकल गया है। यह मजबूत क्रेडिट डिमांड का संकेत देता है।

साउथ इंडियन बैंकों में लोन बांटने की रफ्तार तेज

मार्च तिमाही (Q4FY24) में पांच साउथ इंडियन बैंकों में जबरदस्त लेंडिंग एक्टिविटी देखी गई, जहां क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) लगातार डिपॉजिट ग्रोथ (Deposit Growth) से आगे निकलती रही। सरकारी बैंक Indian Bank हो या प्राइवेट सेक्टर के South Indian Bank, Karur Vysya Bank, Karnataka Bank, और Tamilnad Mercantile Bank, इन सभी ने दिखाया कि अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग काफी मजबूत है।

Indian Bank ने इस दौड़ में सबसे आगे रहा। बैंक के ग्रॉस एडवांसेज (Gross Advances) मार्च के अंत तक 13.6% बढ़कर ₹6.68 लाख करोड़ हो गए। वहीं, डिपॉजिट ग्रोथ 12.6% बढ़कर ₹14.98 लाख करोड़ रही, जो कि लेंडिंग की रफ्तार से थोड़ी कम थी। बैंक ने अपने एडवांसेज में बढ़ोतरी का मुख्य कारण RAM सेक्टर—रिटेल, एग्रीकल्चर और एमएसएमई (MSME)—को बताया, जिसमें 15.7% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹4.06 लाख करोड़ तक पहुंच गया। बैंक के कुल डिपॉजिट्स में कम लागत वाले सीएएसए (CASA) डिपॉजिट्स का अनुपात भी तिमाही दर तिमाही बढ़कर 39.86% हो गया।

प्राइवेट बैंकों की बात करें तो, South Indian Bank ने ग्रॉस एडवांसेज में 15.66% की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹1.01 लाख करोड़ रहा, जबकि डिपॉजिट्स 14.71% बढ़कर ₹1.23 लाख करोड़ हुए। Karur Vysya Bank के एडवांसेज 16.87% बढ़कर ₹97,052 करोड़ रहे, वहीं डिपॉजिट्स 13.31% की दर से बढ़कर ₹1.16 लाख करोड़ हो गए। Tamilnad Mercantile Bank के एडवांसेज 20.32% की शानदार बढ़त के साथ ₹53,380 करोड़ पर पहुंच गए, जो डिपॉजिट ग्रोथ 14.94% (₹61,712 करोड़) से काफी ज्यादा है।

Karnataka Bank ने 6.9% की मामूली एडवांसेज ग्रोथ (₹83,337 करोड़) दर्ज की, लेकिन इसके डिपॉजिट्स 3.8% बढ़कर ₹1.09 लाख करोड़ हुए। यह प्रदर्शन लेंडिंग पर मजबूत फोकस को दर्शाता है। ऐसे में, अगर लोन पर ब्याज दरें फंडिंग लागत से तेजी से बढ़ीं, तो बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) बढ़ सकती है।

बैंकों के लिए इस ट्रेंड का मतलब

लोन ग्रोथ का डिपॉजिट ग्रोथ से लगातार आगे रहना यह संकेत दे सकता है कि बैंकों के पास लिक्विडिटी (Liquidity) पर थोड़ा दबाव है या वे ज्यादा कमाई वाले एसेट्स (Assets) का रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहे हैं। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या बैंक बढ़ती लोन डिमांड को पूरा करने के लिए डिपॉजिट्स बढ़ाने में सफल होते हैं, जिसका असर भविष्य में लेंडिंग क्षमता और प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ सकता है।

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