South Indian Bank अपना खुद का इन-हाउस टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है, जिसके जरिए वे फाइनेंशियल ईयर 2028 की पहली तिमाही तक अपना क्रेडिट कार्ड बिजनेस लॉन्च करेंगे। इस कदम का मकसद को-ब्रांडेड पार्टनरशिप से जुड़ी रेगुलेटरी बाधाओं को खत्म करना है।
रेगुलेटरी बाधाओं से मुक्ति
South Indian Bank ने फैसला किया है कि वह अब को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड पार्टनरशिप पर निर्भर नहीं रहेगी। RBI की बढ़ती सख्ती और डेटा शेयरिंग से जुड़ी चिंताओं के बीच बैंक अब अपना खुद का टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बना रहा है। इससे बैंक न केवल स्वतंत्र होगा, बल्कि थर्ड-पार्टी फिनटेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता भी खत्म कर सकेगा।
लोन पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
मैनेजिंग डायरेक्टर महेश मुरलीधर पई के नेतृत्व में बैंक अपने लोन बुक को रिकास्ट कर रहा है। फिलहाल बैंक का 61% पोर्टफोलियो रिटेल, एग्रीकल्चर और MSME लेंडिंग में है, जिसे अगले तीन साल में बढ़ाकर 65% करने का लक्ष्य है। बैंक का मानना है कि बड़े कॉर्पोरेट लोन के मुकाबले रिटेल और छोटे बिजनेस लोन पर उन्हें बेहतर ब्याज दरें (Net Interest Margins) मिलती हैं।
शानदार फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
बैंक के हालिया तिमाही नतीजे काफी मजबूत रहे हैं। Q2 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 21% बढ़कर ₹426 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी दौरान ₹351 करोड़ था। बैंक के ग्रॉस एडवांसेज 19% की ग्रोथ के साथ ₹1.10 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं, वहीं नेट इंटरेस्ट मार्जिन भी 10 बेसिस पॉइंट्स सुधरकर 3.33% हो गया है।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह रणनीति विकास की नई राह खोल सकती है, लेकिन इन-हाउस प्लेटफॉर्म बनाना एक बड़ा ऑपरेशनल जोखिम है। यदि टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर देरी होती है, तो लॉन्च टल सकता है। इसके अलावा, रिटेल और MSME सेगमेंट पर फोकस बढ़ाने से अनसिक्योर्ड लोन का रिस्क भी बढ़ सकता है। क्रेडिट कार्ड बाजार पहले से ही बड़े निजी बैंकों के दबदबे वाला क्षेत्र है, इसलिए बैंक के लिए ग्राहकों को जोड़ना और एसेट क्वालिटी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
