रिकॉर्ड प्रॉफिट की कहानी
साउथ इंडियन बैंक ने अपनी एसेट क्वालिटी में शानदार सुधार किया है। मार्च 2026 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर कुल लोन का सिर्फ 1.43% रह गए, जबकि एक साल पहले यह 3.20% था। वहीं, नेट NPAs 0.92% से गिरकर 0.29% पर आ गए। बैंक ने प्रोविजन्स और कंटिंजेंसी में 85% की भारी कमी की, जो घटकर ₹34 करोड़ रह गए। इस क्लीन बैलेंस शीट और दमदार रिकवरी ने प्रॉफिट को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
NIM दबाव के बीच रणनीति
हालांकि, रिकॉर्ड प्रॉफिट के बावजूद, बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में थोड़ी नरमी देखी गई। Q4 FY26 में NIMs तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 2.95% तक बढ़े, जो Q3 FY26 के 2.86% से बेहतर है। लेकिन, साल-दर-साल आधार पर NIMs पिछले साल के 3.21% की तुलना में घटकर 2.95% पर आ गए। बैंक का मैनेजमेंट उच्च-यील्ड वाले रिटेल और MSME लोन पर फोकस बढ़ाकर NIMs को 3-3.25% के स्तर पर वापस लाने की योजना बना रहा है। डिजिटल ट्रांजैक्शन्स अब बैंक के लगभग 99% बिजनेस का हिस्सा हैं, जिससे ऑपरेटिंग कॉस्ट कम हुई है।
वैल्यूएशन और जोखिम
साउथ इंडियन बैंक फिलहाल लगभग 7.74 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। यह फेडरल बैंक (P/E ~16.50) और करूर वैश्य बैंक (P/E ~12.57) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी कम है, जो इसके बेहतर एसेट क्वालिटी के बावजूद वैल्यूएशन गैप का संकेत देता है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों का असर रेमिटेंस फ्लो पर पड़ सकता है, जो NRI डिपॉजिट का एक अहम जरिया है। MSME पोर्टफोलियो भी इन जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील है।
डिविडेंड का ऐलान
बैंक के बोर्ड ने FY2025-26 के लिए ₹0.45 प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है, जो पिछले साल से बढ़ा हुआ है। यह मैनेजमेंट के आत्मविश्वास को दर्शाता है। बैंक का लक्ष्य डिजिटल सेवाओं और सुरक्षित लेंडिंग पर ध्यान केंद्रित करते हुए स्थिर और लाभदायक ग्रोथ हासिल करना है।
