हाल के दिनों में South Indian Bank (SIB) पर निवेशकों का ध्यान तेजी से बढ़ा है। खासकर, बड़े प्राइवेट बैंकों की ओर से संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) कुछ हिचकिचाहट दिखा रहे थे, लेकिन SIB के मामले में कहानी कुछ अलग है। बैंक के फंडामेंटल्स (Fundamentals) में लगातार सुधार दिख रहा है, लेकिन मार्केट वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर अभी भी कुछ सवाल खड़े कर रहा है। यह एक ऐसा विरोधाभास है जहाँ सुधार तो हो रहा है, पर बाजार उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहा।
MSME सेगमेंट में दमदार प्रदर्शन
South Indian Bank ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज (MSME) सेगमेंट पर खास ध्यान दिया है, जिसका नतीजा शानदार रहा है। सरकारी पहलों और क्रेडिट गारंटी में बढ़ोतरी के चलते, बैंक के MSME लोन 45% साल-दर-साल बढ़कर Q3FY26 में ₹1,677 करोड़ तक पहुंच गए। बैंक ने लोन प्रोसेसिंग को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और विशेष लेंडिंग स्ट्रेटेजीज़ (Lending Strategies) अपनाई हैं।
रिटेल और डिजिटल मोर्चे पर भी तेजी
MSME के अलावा, बैंक का रिटेल सेगमेंट भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। Q3FY26 में रिटेल एडवांसेज (Retail Advances) 60% की बढ़त के साथ ₹7,864 करोड़ पर पहुंच गए। इसी के साथ, रिटेल डिपॉजिट्स (Retail Deposits) में भी बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹1,02,421 करोड़ से बढ़कर ₹1,15,563 करोड़ हो गए। डिजिटल ट्रांजैक्शन्स (Digital Transactions) में भी 16% से अधिक का उछाल आया है, जो अब 43.5 लाख तक पहुंच गए हैं।
बेहतर वित्तीय स्थिति और एसेट क्वालिटी
वित्तीय नतीजों की बात करें तो, Q3FY26 में South Indian Bank का रेवेन्यू 6.19% बढ़कर ₹2,518 करोड़ रहा, जबकि नेट प्रॉफिट (Net Profit) 9% की बढ़ोतरी के साथ ₹374 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एसेट क्वालिटी में भी जबरदस्त सुधार हुआ है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPAs) 4.3% से घटकर 2.7% पर आ गए, वहीं नेट NPAs (Net NPAs) 1.25% से लुढ़ककर 0.45% हो गए। बैंक का रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 13.8% रहा, जो इंडस्ट्री मीडियन (Industry Median) से थोड़ा ऊपर है।
वैल्यूएशन का पहेली
इन तमाम सकारात्मक डेवलपमेंट के बावजूद, South Indian Bank का वैल्यूएशन एक बड़ी पहेली बना हुआ है। शेयर 7.6x के P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो इंडस्ट्री मीडियन 15.9x से काफी कम है। इसकी तुलना में Federal Bank 16.9x और City Union Bank 17.2x पर ट्रेड कर रहे हैं। इसी तरह, P/B (प्राइस-टू-बुक वैल्यू) रेश्यो भी 1x है, जबकि इंडस्ट्री मीडियन 1.4x है। पिछले एक साल में शेयर में 60% की बढ़ोतरी के बावजूद, यह डिस्काउंट (Discount) बताता है कि संस्थागत निवेशक पूरी तरह से शेयर के री-रेटिंग (Re-rating) पर दांव लगा रहे हैं।
बाजार की झिझक और जोखिम
संस्थागत निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी (FIIs 20.94%, DIIs 13.8%) के बावजूद, मार्केट में कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) की 'Buy' रेटिंग है, लेकिन टारगेट प्राइस ₹40-₹44 के आसपास है, जो मौजूदा स्तरों से ज्यादा बढ़त का संकेत नहीं देता। बैंक पर ₹19,546 करोड़ की आकस्मिक देनदारियां (Contingent Liabilities) भी हैं। इसके अलावा, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSU Banks) का मजबूत प्रदर्शन भी कुछ निवेशकों का ध्यान प्राइवेट बैंकों से हटा सकता है, खासकर मिड-कैप बैंकों से।
आगे की राह
South Indian Bank की MSME और रिटेल पर फोकस, डिजिटल सुधार और बेहतर एसेट क्वालिटी भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करते हैं। संस्थागत निवेश इस बात का संकेत है कि वे इन सुधारों की निरंतरता और वैल्यूएशन में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, मार्केट का सतर्क रवैया यह बताता है कि कंपनी को ग्रोथ टारगेट को बनाए रखना होगा और जोखिमों को कम करना होगा ताकि शेयर में टिकाऊ तेजी आ सके।