लिक्विडिटी का खेल
SoftBank ने यह बिकवाली अपने SVF II Lightbulb (Cayman) फंड के जरिए की है। यह कंपनी की तरफ से किसी कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है। SoftBank ने 5.65 करोड़ शेयर ₹508.55 प्रति शेयर के औसत भाव पर बेचे हैं। इस सौदे के बाद, भारतीय रिटेल आईवियर सेक्टर में निवेश करने वाली इस जापानी कंपनी की हिस्सेदारी करीब 13.13% से घटकर 10% से थोड़ी कम हो गई है। हालांकि, SoftBank अभी भी एक बड़ा शेयरहोल्डर बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि वे धीरे-धीरे बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं ताकि शेयर की वैल्यूएशन को अचानक झटका न लगे।
संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी
यह ब्लॉक डील सामान्य बाजार बिकवाली से बिल्कुल अलग थी। पारंपरिक बिक्री में जहां रिटेल निवेशक घबरा जाते हैं, वहीं Lenskart के इस सौदे में तुरंत ही दुनिया भर के बड़े और अनुभवी संस्थागत निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF), फिडेलिटी (Fidelity) के साथ-साथ ICICI Prudential और HDFC Life जैसे कई भारतीय म्यूचुअल फंडों ने भी इस डील में हिस्सा लिया। यह साफ दिखाता है कि कंपनी के शेयरों में संस्थागत मांग अभी भी मजबूत है। इन बड़े निवेशकों की खरीद क्षमता Lenskart के वैल्यूएशन को सहारा दे रही है, और वे इन मौजूदा भावों पर शेयर खरीदने में सहज महसूस कर रहे हैं। हालांकि, इस सौदे के चलते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शेयर में 1.54% की मामूली गिरावट दर्ज की गई।
जोखिम का पहलू
निवेशकों को यह भी समझना होगा कि जब कोई बड़ा वेंचर कैपिटल निवेशक अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू करता है, तो यह अक्सर उस निवेश के अंतिम चरण का संकेत होता है। Lenskart पर अपनी प्रीमियम वैल्यूएशन को साबित करने का भारी दबाव है, खासकर जब वे सप्लाई चेन ऑटोमेशन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार में भारी निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा, तेजी से बढ़ते और पूंजी-गहन रिटेल ग्रोथ पर निर्भरता कंपनी को बाहरी खर्चों के प्रति संवेदनशील बनाती है। आलोचक अक्सर तेजी से रिटेल विस्तार से जुड़े हाई बर्न रेट (High Burn Rate) का जिक्र करते हैं, जो कि भविष्य में लाभप्रदता (Profitability) के लक्ष्यों को मुश्किल बना सकता है, खासकर अगर मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल में उपभोक्ता विश्वास कम होता है।
आगे की राह
इंडस्ट्री के एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी टियर-II और टियर-III शहरों में अपना विस्तार जारी रखेगी, जिसके लिए लगातार पूंजी की जरूरत होगी। SoftBank की हिस्सेदारी में यह कमी एक फंड के लिए सामान्य लिक्विडिटी (Liquidity) इवेंट के तौर पर देखी जा रही है, जो अपने एग्जिट (Exit) की समय-सीमा के करीब है। हालांकि, पूरा बाजार अगले कुछ तिमाहियों में कंपनी के मार्जिन में सुधार के संकेतों पर नजर रखेगा। दुनिया भर के संस्थागत पूंजी के प्रवेश के साथ, Lenskart का स्वामित्व ढांचा तेजी से संस्थागत बन रहा है, जो आमतौर पर सार्वजनिक बाजार में लिस्टिंग से पहले अधिक अनुशासित वित्तीय रिपोर्टिंग और परिचालन शासन की ओर इशारा करता है।
