रिटायरमेंट के बाद ज्यादा कमाई की चाह रखने वाले सीनियर सिटीजंस के लिए Small Finance Banks एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं। जहाँ सरकारी बैंक अधिकतम **7.10%** ब्याज दे रहे हैं, वहीं ये बैंक **8.50%** तक का रिटर्न ऑफर कर रहे हैं।
बड़े बैंकों से क्यों ज्यादा है ब्याज?
बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंकों के पास सस्ते डिपॉजिट का बड़ा आधार होता है, लेकिन Small Finance Banks को अपना कामकाज चलाने के लिए अधिक पूंजी की जरूरत होती है। ये बैंक मुख्य रूप से माइक्रो-एंटरप्राइजेज और छोटे कारोबारियों को लोन देते हैं, जिसमें रिस्क ज्यादा होता है। इसी रिस्क की भरपाई और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ये बैंक एफडी (FD) पर 8.50% तक का आकर्षक ब्याज देते हैं।
DICGC इंश्योरेंस का ध्यान रखें
ज्यादा ब्याज देखकर अपनी पूरी सेविंग्स एक ही बैंक में डालने की गलती न करें। भारत में किसी भी बैंक में आपकी जमा राशि पर ₹5 लाख तक का ही इंश्योरेंस मिलता है, जिसे DICGC कवर करता है। अगर बैंक फेल होता है, तो ₹5 लाख से ऊपर की राशि पर कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए, निवेश करने से पहले इस इंश्योरेंस लिमिट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
टेन्योर और लिक्विडिटी का गणित
याद रखें कि 8.50% का पीक रेट हर स्कीम पर लागू नहीं होता। यह अक्सर किसी विशेष अवधि (जैसे 5 साल) की स्कीम से जुड़ा होता है। साथ ही, समय से पहले पैसा निकालने पर बैंक पेनल्टी भी वसूलते हैं, जिससे आपकी कमाई का असर कम हो सकता है। निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी लिक्विडिटी की जरूरत और कैपिटल की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
