CRISIL Ratings के मुताबिक, मार्च 2027 तक स्मॉल फाइनेंस बैंकों का ग्रॉस NPA गिरकर **2.6% से 2.8%** तक आ सकता है। इसकी मुख्य वजह इन बैंकों का सुरक्षित लोन (Secured Lending) की ओर शिफ्ट होना है।
स्मॉल फाइनेंस बैंक अपनी लेंडिंग स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव कर रहे हैं ताकि खराब लोन (Bad Loans) को कम किया जा सके। CRISIL Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर का ग्रॉस NPA मार्च 2027 तक 2.6% से 2.8% के दायरे में आने की उम्मीद है। यह सुधार अचानक नहीं है, बल्कि इन बैंकों ने माइक्रोफाइनेंस पर अपनी निर्भरता कम करके सुरक्षित लेंडिंग प्रोडक्ट्स की ओर रुख किया है।
सुरक्षित लेंडिंग की तरफ झुकाव
बैंकों के बिजनेस मॉडल में आया सबसे बड़ा बदलाव उनके लोन पोर्टफोलियो में विविधता लाना है। फाइनेंशियल ईयर 2022 में नॉन-माइक्रोफाइनेंस प्रोडक्ट्स का हिस्सा कुल एडवांस का लगभग 50% था, जो 2026 तक बढ़कर करीब 70% पहुंच गया है। माइक्रोफाइनेंस के रिस्क को कम करते हुए, जून 2026 तक इनके डायरेक्ट माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में 28.5% की सालाना गिरावट देखी गई है, जो ₹83,080 करोड़ पर आ गया है। हालांकि, ये बैंक अभी भी NBFC-MFIs के लिए फंडिंग पार्टनर की मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और पहली तिमाही में 80.4% नई डेट फंडिंग इन्हीं बैंकों से आई है।
नए पोर्टफोलियो में छिपे खतरे
माइक्रोफाइनेंस से दूरी बनाना स्थिरता के लिए अच्छा है, लेकिन निवेशकों को नए जोखिमों को समझना होगा। अब ये बैंक MSME लोन और अनसिक्योर्ड रिटेल क्रेडिट की तरफ बढ़ रहे हैं। डेटा संकेत देता है कि ये क्षेत्र भविष्य में नई चुनौती बन सकते हैं। इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी और ग्लोबल अस्थिरता के चलते MSME सेक्टर के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे स्लिपेज रेट बढ़ सकता है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
2027 तक एसेट क्वालिटी में सुधार का रास्ता कई चीजों पर टिका है। केवल NPA नंबर्स ही नहीं, बल्कि बैंकों की डिपॉजिट जुटाने की क्षमता और क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो पर नजर रखना जरूरी है। इसके अलावा, सरकारी पॉलिसी और लोन माफी जैसे फैसले भी रिकवरी की उम्मीदों को बदल सकते हैं। निवेशकों को यह भी देखना होगा कि क्या एसेट क्वालिटी का यह सुधार वाकई मजबूत है या सिर्फ बुक-कीपिंग के बदलाव का असर है।
