Slice Small Finance Bank ने जून तिमाही में **₹50.9 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह आंकड़ा पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर के मुनाफे से भी ज्यादा है। बैंक फिलहाल **$50-100 मिलियन** की फ्रेश कैपिटल जुटाने की कोशिश कर रहा है।
Slice Small Finance Bank ने किया दमदार प्रदर्शन
Slice Small Finance Bank के लिए जून तिमाही (Q1 FY27) शानदार रही है। बैंक ने ₹50.9 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो कि पिछले पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के कुल ₹48.4 करोड़ के मुनाफे से भी अधिक है। पिछले साल इसी अवधि में बैंक को ₹10.1 करोड़ का घाटा हुआ था, जिससे यह एक बड़ा टर्नअराउंड (Turnaround) दिखाता है।
इनकम में 38.6% की बढ़त
बैंक की कुल इनकम (Total Income) इस तिमाही में 38.6% बढ़कर ₹413.8 करोड़ हो गई। यह इनकम ग्रोथ बैंक के डिजिटल बैंकिंग के विस्तार को दर्शाती है, जहां वे लेंडिंग, डिपॉजिट और UPI जैसे सर्विसेज दे रहे हैं।
डिपॉजिट बेस मजबूत, लोन बुक में 55% की बढ़त
Slice Small Finance Bank अपने डिपॉजिट बेस को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। बैंक का CASA (Current Account-Savings Account) रेश्यो 43.9% रहा। रिटेल टर्म डिपॉजिट्स के साथ मिलाकर, ये बैंक के कुल डिपॉजिट्स का 94.7% हैं। इससे पता चलता है कि बैंक अब महंगे होलसेल बोरिंग (Wholesale Borrowing) से दूर जा रहा है। बैंक की ग्रॉस लोन बुक (Gross Loan Book) 55% बढ़कर ₹5,098 करोड़ हो गई, जबकि कुल डिपॉजिट्स लगभग दोगुने होकर ₹5,765 करोड़ हो गए।
नई कैपिटल जुटाने की कोशिश
इन सबके बावजूद, बैंक को फंडिंग में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Slice Small Finance Bank फिलहाल $50 मिलियन से $100 मिलियन के बीच नई कैपिटल जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फंडिंग राउंड पिछले पीक वैल्यूएशन $1.3 बिलियन से कम वैल्यूएशन पर हो सकता है। यह फिनटेक (Fintech) कंपनियों के लिए मौजूदा कैपिटल मार्केट में एक आम वैल्यूएशन करेक्शन (Valuation Correction) का संकेत देता है।
एसेट क्वालिटी में सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) में भी सुधार देखा गया है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 4.36% हो गए हैं, जो पिछले साल 6.31% थे। नेट NPAs भी 3.24% पर आ गए हैं, जबकि पहले ये 4.66% थे। बैंक का कैपिटल-टू-रिस्क-वेटेड एसेट्स रेश्यो (CRAR) 18.2% है, जो रेगुलेटरी (Regulatory) आवश्यकताओं से काफी ऊपर है।
आगे की राह
अब देखना यह होगा कि बैंक अपनी प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखते हुए डिजिटल लेंडिंग (Digital Lending) को कैसे बढ़ाता है। फिनटेक-टू-बैंक मॉडल (Fintech-to-Bank Model) में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। बैंक के लिए फंडिंग राउंड का पूरा होना और लोन बुक की क्वालिटी बनाए रखना अहम होगा।
