सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट ने एक पुराने विवाद को सुलझाने के लिए Tata Power की दो विदेशी सब्सिडियरीज में हिस्सेदारी जब्त करने का आदेश दिया है। इस कानूनी संकट के चलते कंपनी के शेयरों में **3.55%** की गिरावट देखी गई है।
कानूनी शिकंजा और एसेट सेल
सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट (SICC) ने कोर्ट के शेरिफ को Tata Power की दो कंपनियों—Bhira Investments Pte. Ltd. और Tata Power International Pte. Ltd.—में मौजूद इक्विटी को जब्त कर बेचने की मंजूरी दे दी है। यह कदम $650 मिलियन से अधिक के आर्बिट्रेशन कर्ज की वसूली के लिए उठाया गया है। कोर्ट ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द करने से इनकार कर दिया है, जो कंपनी के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा मामला साल 2013-2014 के एक रूस स्थित कोयला प्रोजेक्ट से जुड़ा है। Kleros Capital Partners के साथ हुए इस विवाद में 2023 में आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने Tata Power को कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने और डेटा के गलत इस्तेमाल का दोषी पाया था। जुलाई 2025 में जुर्माना $490.32 मिलियन तय किया गया था, लेकिन 5.33% सालाना ब्याज के कारण अब यह लायबिलिटी लगातार बढ़ रही है, जिसमें रोजाना $71,600 से ज्यादा का ब्याज जुड़ रहा है।
बाजार की प्रतिक्रिया और कंपनी का स्टैंड
इस खबर के सामने आते ही 6 नवंबर, 2026 को शेयर बाजार में बिकवाली हावी रही और Tata Power का भाव इंट्राडे में ₹352 तक गिर गया, जो 3.55% की गिरावट को दर्शाता है। हालांकि, Tata Power ने इस आदेश को चुनौती दी है, लेकिन फिलहाल स्टे (stay) न मिलने के कारण एसेट सेल की प्रक्रिया जारी है।
दूसरी तरफ, कंपनी ने भारत में भी अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया है। Tata Power ने लगभग ₹4,800 करोड़ के फ्रॉड का आरोप लगाते हुए एक FIR दर्ज कराई है, जिसमें डेटा लीक और माइनिंग लाइसेंस से जुड़ी गड़बड़ियों का हवाला दिया गया है। फिलहाल, निवेशक कंपनी की अपील और भारत में चल रही कानूनी कार्रवाई पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
