Sindhuja Microcredit ने ₹47 करोड़ जुटाए, वित्तीय समावेशन को मिलेगा बढ़ावा
Sindhuja Microcredit ने हाल ही में प्री-सीरीज़ D फंडिंग राउंड में $5 मिलियन (लगभग ₹47 करोड़) की भारी रकम जुटाई है। इस राउंड में कंपनी के पुराने निवेशक Abler Nordic, GAWA Capital और Oikocredit ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस नई पूंजी से कंपनी न सिर्फ अपनी वित्तीय नींव को मजबूत करेगी, बल्कि अपने कारोबार का विस्तार भी करेगी। खास तौर पर, इसका मुख्य उद्देश्य वंचित समुदायों, विशेषकर महिला उद्यमियों और छोटे व मध्यम व्यवसायों (MSMEs) तक कर्ज की पहुंच को आसान बनाना है।
निवेशकों का भरोसा कायम
यह दिखाता है कि चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल में भी Sindhuja Microcredit निवेशकों का भरोसा जीतने में कामयाब रही है। कंपनी का इतिहास रहा है कि उसने IL&FS संकट और COVID-19 महामारी की शुरुआती मुश्किलों के दौरान भी सफलतापूर्वक निवेश जुटाया है। कंपनी के सह-संस्थापक Abhisheka Kumar और Malkit Singh Didyala ने कहा कि इस फंड से कम आय वाली महिलाओं और वंचित उद्यमियों को टेक्नोलॉजी-संचालित माइक्रोफाइनेंस समाधान प्रदान करने के मिशन को आगे बढ़ाया जाएगा।
परिचालन का दायरा और उद्योग की स्थिति
Sindhuja Microcredit वर्तमान में 12 राज्यों में फैले 366 ब्रांचों के साथ काम कर रही है और अपने आठ साल के सफर में 500,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा दे चुकी है। मार्च 2026 तक, कंपनी की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,038.67 करोड़ थी। भारतीय माइक्रोफाइनेंस सेक्टर महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के कारण निवेशकों के लिए आकर्षक बना हुआ है। हालांकि, सेक्टर को चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसमें मार्च 2025 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) के 16% तक बढ़ने का अनुमान है। Sindhuja ने अपनी एसेट क्वालिटी मजबूत रखी है, वित्तीय वर्ष 2025 के लिए 90+ दिन की देरी से भुगतान की दर 0.6% और कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 30% दर्ज किया है। कंपनी ने मौजूदा बाजार की स्थिति को देखते हुए भविष्य में सीरीज डी राउंड के लिए वैल्यूएशन चर्चा को स्थगित करने और मौजूदा निवेशकों को छूट देने का फैसला किया है।
सेक्टर की चुनौतियां
Sindhuja की मजबूती के बावजूद, व्यापक भारतीय माइक्रोफाइनेंस उद्योग कुछ गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। पिछले साल 8.8% की तुलना में मार्च 2025 तक ग्रॉस NPAs 16% तक पहुंच सकते हैं। कर्जदारों द्वारा अत्यधिक कर्ज लेना और आर्थिक मंदी जैसी वजहों से यह बढ़ोतरी हुई है, जिसका असर मुनाफे पर पड़ रहा है। Sindhuja के अपने ग्रॉस NPAs दिसंबर 2024 तक बढ़कर 2.9% हो गए थे, जबकि कलेक्शन एफिशिएंसी 90% थी। कंपनी ने राजस्थान जैसे कुछ इलाकों में भुगतान में देरी में वृद्धि देखी है, जिससे वहां कुछ समय के लिए नए कर्ज बांटना रोक दिया गया था। असुरक्षित माइक्रो-लेंडिंग में स्वाभाविक रूप से कर्जदार की क्रेडिट प्रोफाइल और परिचालन लागतों के कारण जोखिम जुड़ा होता है।
भविष्य की योजनाएं
यह नई पूंजी Sindhuja को वित्तीय वर्ष 2025 में दक्षिण और पश्चिम भारत के राज्यों जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में विस्तार करने में मदद करेगी। प्रबंधन टीम का लक्ष्य वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी के माध्यम से वित्तीय समावेशन को बढ़ाना है। इंडिया रेटिंग्स ने कंपनी की पूंजीकरण और प्रबंधन को देखते हुए Sindhuja के कर्ज पर 'पॉजिटिव' आउटलुक बनाए रखा है, लेकिन साथ ही एकाग्रता और कर्जदार के क्रेडिट जोखिमों पर भी ध्यान दिलाया है।
