Shriram Wealth के CEO विकास सतीजा के मुताबिक, इस साल विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई **₹3.08 लाख करोड़** की रिकॉर्ड बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार मजबूती से खड़ा है। इसका सबसे बड़ा श्रेय घरेलू निवेशकों के लगातार जारी SIP निवेश को जाता है, जिसने बाजार को बड़े क्रैश से बचाया है।
बाजार की बदलती तस्वीर और लचीलापन
इक्विटी मार्केट इस समय भारी दबाव से गुजर रहा है। साल की शुरुआत से अब तक विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड ₹3.08 लाख करोड़ निकाले हैं। ऐतिहासिक तौर पर देखें तो इतनी बड़ी निकासी से बाजार में 40% से 50% तक का बड़ा क्रैश देखने को मिल सकता था, लेकिन इस बार भारतीय बाजार कहीं ज्यादा लचीला साबित हुआ है।
Shriram Wealth के MD और CEO विकास सतीजा का मानना है कि भारतीय निवेशकों का व्यवहार पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां निवेशक वैश्विक उतार-चढ़ाव देखकर पैनिक सेलिंग (Panic Selling) करते थे, वहीं अब वे एक अनुशासित तरीके से SIP के जरिए पैसा लगा रहे हैं। यही निवेश बाजार के लिए एक 'कुशन' या सुरक्षा कवच का काम कर रहा है।
लंबी अवधि का नजरिया
भले ही बेंचमार्क Sensex में साल की शुरुआत से अब तक 14% की गिरावट आई है, लेकिन मार्केट पूरी तरह बिखरने से बच गया है। यह साफ दर्शाता है कि भारतीय निवेशक अब परिपक्व (Mature) हो चुके हैं और बाजार के छोटे करेक्शन को लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन का हिस्सा मान रहे हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स भी स्थिर हैं। GDP ग्रोथ 6.5% से 7% के दायरे में है, जबकि महंगाई 3.5% से 4% के नियंत्रित स्तर पर बनी हुई है।
आगे का रास्ता और निगरानी के बिंदु
हालांकि रिटेल निवेशकों का भरोसा फिलहाल बाजार को सहारा दे रहा है, लेकिन यदि बाजार में गिरावट लंबी खिंचती है, तो रिटेल सेंटीमेंट की असली परीक्षा होगी। बाजार पर नजर रखने वालों के लिए ये बातें अहम हैं:
- AMFI डेटा: हर महीने आने वाले SIP आंकड़ों पर नजर रखें। यदि SIP निवेश में कमी आती है, तो बाजार का सुरक्षा कवच कमजोर पड़ सकता है।
- FII एक्टिविटी: अगले कुछ क्वार्टर में विदेशी निवेशकों का रुख कैसा रहता है, यह बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
