Shriram Finance ने जुलाई 2026 तक के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। कंपनी 3 से 5 साल की अवधि पर सीनियर सिटीजंस को **8%** तक का ब्याज दे रही है। हालांकि, ये दरें पब्लिक सेक्टर बैंकों की तुलना में आकर्षक हैं, लेकिन इनमें थोड़ा ज्यादा रिस्क भी शामिल हो सकता है।
Shriram Finance ने बदली FD की चाल
साल 2026 के जुलाई महीने में, भारत में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरों का बाजार काफी दिलचस्प बना हुआ है। इसी कड़ी में, Shriram Finance Limited (SFL) ने 2 जुलाई, 2026 से अपनी जमा योजनाओं में कुछ बदलाव किए हैं। कंपनी का फोकस उन निवेशकों पर है जो लंबे समय के लिए पैसा लगाना चाहते हैं। अब, सामान्य जमाकर्ताओं के लिए 36 से 60 महीने की अवधि पर 7.5% तक का ब्याज ऑफर किया जा रहा है। वहीं, सीनियर सिटीजंस को 0.50% का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे उनकी कुल कमाई 8% तक पहुंच जाएगी। इसके अलावा, कंपनी महिलाओं के लिए 0.05% और मैच्योरिटी के बाद डिपॉजिट रिन्यू कराने वालों के लिए 0.15% का अतिरिक्त इंसेंटिव भी दे रही है।
कहां मिल रहा है ज्यादा मुनाफा?
आज के बाजार में, बड़े कमर्शियल बैंकों और छोटे, विशेष NBFCs के बीच ब्याज दरों का अंतर साफ दिख रहा है। जहां State Bank of India, Punjab National Bank और Bank of Baroda जैसे बड़े सरकारी बैंक इन अवधियों पर आमतौर पर 6.80% से 7.05% का ब्याज दे रहे हैं, वहीं स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) और NBFCs ज्यादा कैपिटल आकर्षित करने के लिए ऊंची दरें दे रहे हैं। उदाहरण के लिए, Shivalik Small Finance Bank और Suryoday Small Finance Bank जैसी संस्थाएं 8.25% से 8.30% तक की दरें दे रही हैं। Bandhan Bank और YES Bank जैसे प्राइवेट सेक्टर के बैंक बीच में कहीं, 7.75% तक की दरें दे रहे हैं।
कितना सुरक्षित है आपका पैसा?
जब निवेशक ऊंची ब्याज दरों की तलाश करते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि वे किस संस्थान में पैसा लगा रहे हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंकों में जमा राशि Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) द्वारा ₹5 लाख प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक तक सुरक्षित होती है। इसके विपरीत, Shriram Finance जैसी NBFCs में जमा पर यह सरकारी बीमा कवर नहीं मिलता है। ये संस्थाएं Reserve Bank of India (RBI) के नियमों के तहत आती हैं और अपनी वित्तीय स्थिरता बताने के लिए क्रेडिट रेटिंग पर निर्भर करती हैं।
ब्याज दर के अलावा, निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि प्रीमच्योर निकासी पर कितना जुर्माना लग सकता है। साथ ही, आपकी कमाई के हिसाब से इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार इस ब्याज पर टैक्स भी लगेगा। Form 15G या 15H का इस्तेमाल कम आय वालों के लिए TDS से बचने के लिए किया जा सकता है, लेकिन यह कुल टैक्स देनदारी को खत्म नहीं करता है।
इन प्रोडक्ट्स को चुनते समय निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है NBFC की क्रेडिट रेटिंग पर नजर रखना। यह रेटिंग बताती है कि कंपनी समय पर मूलधन और ब्याज चुकाने की स्थिति में है या नहीं। बाजार की बदलती परिस्थितियों में, CRISIL या ICRA जैसी एजेंसियों की क्रेडिट रेटिंग रिपोर्ट्स पर ध्यान देना, सामान्य बैंक डिपॉजिट की तुलना में इसमें शामिल जोखिमों को समझने में मदद करता है।
