दमदार नतीजे और डिविडेंड का तोहफा
Shriram Finance Ltd. ने 31 मार्च 2026 को समाप्त चौथी तिमाही में ₹3,021 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल इसी अवधि के ₹2,144 करोड़ की तुलना में 41% की बड़ी छलांग है। कंपनी का कुल इनकम भी बढ़कर ₹12,532 करोड़ रहा। बोर्ड ने ₹6 प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड को भी मंजूरी दे दी है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 3 जुलाई 2026 तय की गई है। यह परफॉरमेंस NBFC सेक्टर के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में अनुमानित ग्रोथ के अनुरूप है।
वैल्यूएशन पर सवाल?
अप्रैल 2026 के अंत में Shriram Finance का शेयर लगभग ₹1,037 पर कारोबार कर रहा था, जिसकी मार्केट कैप ₹2.37 ट्रिलियन से ऊपर थी। पिछले बारह महीनों के हिसाब से इसका प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 21x से 27x के बीच है। यह इसके 10 साल के औसत P/E ~11.85x से काफी ज्यादा है। हालांकि, कंपनी ने दमदार प्रॉफिट ग्रोथ (26.7% 5-साल CAGR) दिखाई है, पर वर्तमान P/E अपने 5-साल के शिखर के करीब है। NBFC सेक्टर में पीयर कंपनियां आमतौर पर 25x से 35x के P/E पर ट्रेड करती हैं, जिसका मतलब है कि Shriram Finance सेक्टर में अपनी साथियों के मुकाबले अच्छी कीमत पर है, लेकिन ऐतिहासिक वैल्यूएशन से प्रीमियम पर हो सकता है।
सेक्टर ग्रोथ और क्रेडिट रेटिंग से मजबूती
Shriram Finance जिस NBFC सेक्टर में काम करती है, उसके FY26 में MSME और रिटेल ग्राहकों को लोन देने के कारण 15-17% बढ़ने का अनुमान है। हाल ही में कंपनी की क्रेडिट रेटिंग CRISIL और ICRA द्वारा AAA (Stable) तक बढ़ाई गई है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे फंड की लागत कम हो सकती है और उन साथियों पर इसकी प्रतिस्पर्धी बढ़त बढ़ सकती है जो मार्केट से ज्यादा उधार लेते हैं और फंडिंग के जोखिमों का सामना कर सकते हैं। यह बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल ₹2.6 ट्रिलियन से अधिक के AUM को मैनेज करने में मदद करता है।
NBFC सेक्टर के जोखिमों से निपटना
मजबूत प्रॉफिट और क्रेडिट अपग्रेड के बावजूद, Shriram Finance को कुछ बड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से NBFC सेक्टर पर रेगुलेटरी जांच बढ़ी है, जिसमें सख्त प्रोविजनिंग नियम और हाई-रिस्क वाले लोन की कड़ी निगरानी शामिल है। NBFCs के लिए एक मुख्य चुनौती यह है कि वे करंट अकाउंट सेविंग अकाउंट (CASA) जैसी कम लागत वाली जमाओं तक नहीं पहुंच पाते, जिससे फंडिंग की लागत प्रभावित होती है। हालांकि Shriram Finance की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है (ग्रॉस स्टेज 3 एसेट्स में गिरावट), लेकिन इसके यूज्ड कमर्शियल व्हीकल जैसे बिजनेस सेगमेंट आर्थिक मंदी के दौरान कमजोर हो सकते हैं। कंपनी को डिजिटल पेमेंट मुद्दों के लिए ₹2.7 लाख और KYC खामियों के लिए ₹5.80 लाख जैसे छोटे जुर्माने भी लगे हैं। ये घटनाएं रेगुलेटेड माहौल में लगातार ऑपरेशनल सतर्कता की जरूरत को दर्शाती हैं।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य की राह
एनालिस्ट्स का नजरिया ज्यादातर सकारात्मक है, कंसेंसस 'स्ट्रॉन्ग बाय' रेटिंग दे रहा है। एनालिस्ट्स के प्राइस टारगेट से शेयर में और तेजी की उम्मीद है, कुछ ₹1,200 या उससे अधिक के स्तर का अनुमान लगा रहे हैं। Shriram Finance का मैनेजमेंट कमर्शियल व्हीकल की डिमांड और अन्य लेंडिंग क्षेत्रों में विस्तार के सहारे आने वाले वित्त वर्ष के लिए सिंगल-डिजिट मिड-टीन्स ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है। आगे चलकर प्रमुख प्राथमिकताएं इस ग्रोथ को बनाए रखना, एसेट क्वालिटी का प्रबंधन करना और रेगुलेटरी परिदृश्य के अनुकूल ढलना होगा, साथ ही नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) और लोन बुक विस्तार की निगरानी भी करनी होगी।
