मुनाफे में जोरदार उछाल, पर बाजार की प्रतिक्रिया अलग
Shriram Finance के लिए Q4 FY26 शानदार रहा, जहां कंपनी ने अपने नेट प्रॉफिट में 40.86% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की। यह बढ़कर ₹3,014 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण 15.58% बढ़कर ₹6,994.08 करोड़ तक पहुंची नेट इंटरेस्ट इनकम रही। वहीं, कंपनी की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी 14.85% बढ़कर ₹3.02 ट्रिलियन तक पहुंच गई। ऑपरेशनल एफिशिएंसी में भी सुधार देखने को मिला, जिससे कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो पिछले साल के 27.65% से घटकर 25.32% पर आ गया।
MUFG Bank से बड़ा निवेश और एनालिस्ट्स का भरोसा
कंपनी ने MUFG Bank से ₹39,618 करोड़ का एक रणनीतिक कैपिटल इन्फ्यूजन (Capital Infusion) भी सुरक्षित किया है, जिससे कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो बढ़कर 34% होने की उम्मीद है। इन सबके बावजूद, 27 अप्रैल 2026 को शेयर में करीब 4-5% की गिरावट आई।
ब्रोकरेज हाउस की 'Buy' रेटिंग और टारगेट प्राइस
बाजार की इस प्रतिक्रिया के विपरीत, एनालिस्ट्स Shriram Finance के भविष्य को लेकर काफी उत्साहित हैं। Motilal Oswal और Nomura जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने स्टॉक पर 'Buy' रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस ₹1,200 रखा है। उनका अनुमान है कि FY26 से FY28 के बीच AUM में सालाना 17% और प्रॉफिट में 26% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिल सकती है। FY28 तक, कंपनी का रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) 3.8% और रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) 13.1% रहने का अनुमान है।
वैल्यूएशन पर चिंता और चुनौतियाँ
शेयर इस समय अपने पिछले बारह महीनों की कमाई पर 20-26 गुना के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो और 2.17-2.18 के प्राइस-टू-बुक (P/B) रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो कुछ प्रतिस्पर्धियों की तुलना में प्रीमियम माना जा रहा है। जहां Bajaj Finance और Cholamandalam Investment & Finance जैसे खिलाड़ी भी इसी सेक्टर में हैं, उनकी वैल्यूएशन अलग हो सकती है। पिछले एक साल में Shriram Finance के शेयर में 49.9% की बढ़ोतरी हुई है।
नतीजों के बाद शेयर गिरने की वजहें
नतीजों के बाद शेयर में गिरावट के पीछे कुछ संभावित कारण हो सकते हैं। पहला, स्टॉक का मौजूदा वैल्यूएशन, जो एनालिस्ट्स के टारगेट प्राइस से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था। दूसरा, आर्थिक अनिश्चितताएं। भारत की GDP ग्रोथ Q3 FY26 में 7.8% पर धीमी हुई और मार्च 2026 में महंगाई बढ़कर 3.4% हो गई, जो लोन की मांग को प्रभावित कर सकती है। एसेट क्वालिटी में भी थोड़ी नरमी दिखी, जहां प्रॉब्लम लोंस बढ़कर 4.5% हो गए। कंपनी ने नए DSA कमीशन अकाउंटिंग ट्रीटमेंट से Q4 में ₹515 मिलियन की बचत की, लेकिन इसके लॉन्ग-टर्म असर का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा। मैनेजमेंट ने आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते FY27 के लिए लोन ग्रोथ गाइडेंस को 15-18% तक सीमित कर दिया है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 4.01 है, जो एक महत्वपूर्ण लीवरेज (Leverage) दर्शाता है।
