शॉर्ट सेलर्स क्यों लगा रहे हैं इंश्योरेंस कंपनियों पर दांव?
दरअसल, पिछले एक दशक से कम ब्याज दरों (low interest rates) के माहौल ने US की लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को अपने निवेश पर ज़्यादा रिटर्न कमाने के लिए मजबूर किया है. ऐसे में, उन्होंने 'प्राइवेट क्रेडिट' यानी कंपनियों को सीधे दिए जाने वाले लोन में भारी निवेश करना शुरू कर दिया है. ये वो लोन होते हैं जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम के बाहर दिए जाते हैं.
Moody's के अनुमान के मुताबिक, 2024 तक US लाइफ इंश्योरर्स के $6 ट्रिलियन के कुल निवेश का करीब 35% हिस्सा प्राइवेट क्रेडिट में था. यह तरीका उन्हें पॉलिसीधारकों को लंबे समय तक भुगतान करने में मदद करता है, लेकिन इसमें पारदर्शिता (transparency) की कमी और जोखिम काफी ज़्यादा है.
रेगुलेटर्स की पैनी नज़र
प्राइवेट क्रेडिट में इस बड़ी हिस्सेदारी के चलते अब रेगुलेटर्स (नियामक) की नज़र इन कंपनियों पर तेज़ हो गई है. US ट्रेजरी (वित्त मंत्रालय) ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय इंश्योरेंस रेगुलेटर्स के साथ मिलकर प्राइवेट क्रेडिट के जोखिमों, लोन देने की प्रक्रियाओं और नकदी प्रवाह (cash flow) के मुद्दों पर चर्चा की है. वहीं, नेशनल एसोसिएशन ऑफ इंश्योरेंस कमिश्नर्स (NAIC) वैकल्पिक निवेशों (alternative investments) के लिए पूंजी की ज़रूरतों (capital requirements) से जुड़े नियमों को अपडेट कर रहा है और अपनी निगरानी बढ़ा रहा है.
मार्केट में अंडरपरफॉरमेंस
बाजार की चिंताएं S&P 500 US इंश्योरेंस इंडेक्स के प्रदर्शन में साफ दिख रही हैं. साल की शुरुआत से यह इंडेक्स करीब 5% गिर चुका है, जबकि व्यापक S&P 500 इंडेक्स में करीब 4.7% की बढ़ोतरी हुई है. Barclays के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस साल 15 US लाइफ इंश्योरर्स के संयुक्त आय (combined earnings per share) में करीब 7% की गिरावट आ सकती है.
कुछ खास कंपनियां रडार पर
कई US लाइफ इंश्योरर्स को शॉर्ट सेलर्स से ज़्यादा दबाव का सामना करना पड़ रहा है. Principal Financial Group (PFG) के खिलाफ पिछले एक साल में शॉर्ट सेलिंग 80% से ज़्यादा बढ़ी है. Brighthouse Financial (BHF) में मार्च की शुरुआत में शॉर्ट पोजीशन रिकॉर्ड 13% के पार चली गई थी. Prudential Financial (PRU) में भी शॉर्ट सेलिंग में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है.
प्राइवेट क्रेडिट के मुख्य जोखिम
प्राइवेट क्रेडिट को लेकर मुख्य चिंता लोन डिफॉल्ट (loan defaults) के अलावा कुछ बुनियादी कमजोरियों को लेकर है. इन बाजारों में अक्सर पारदर्शिता की कमी होती है, जिससे जोखिम का आकलन करना मुश्किल हो जाता है. वहीं, बैंकों के मुकाबले इंश्योरर्स द्वारा ढीले नियमों का इस्तेमाल करने की संभावना एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है. इसके अलावा, इंश्योरर्स के एन्युइटी प्रोडक्ट्स (annuity products) और प्राइवेट क्रेडिट निवेशों के बीच बढ़ते संबंध एक खतरनाक चक्र बना सकते हैं.
एनालिस्ट्स का नज़रिया
फिलहाल, एनालिस्ट्स ने PFG, BHF और PRU के लिए 'होल्ड' (Hold) रेटिंग दी है, जिनके टारगेट प्राइस मौजूदा स्तरों के आसपास या मामूली गिरावट का संकेत देते हैं. रेगुलेटर्स से उम्मीद है कि वे इंश्योरर्स के प्राइवेट क्रेडिट निवेशों पर निगरानी और नियमों को और मज़बूत करेंगे.
