Shivalik Small Finance Bank ने **₹109 करोड़** में ManiBhavnam Home Finance का अधिग्रहण पूरा कर लिया है। इस डील के ज़रिए बैंक सस्ते हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में कदम रख रहा है। इससे बैंक के लोन बुक में **₹320 करोड़** जुड़ेंगे, जो कि उत्तर भारत में सिक्योर्ड लेंडिंग (Secured Lending) के विस्तार के लक्ष्य को पूरा करेगा।
सस्ते घर के बाजार में Shivalik SFB की धमाकेदार एंट्री
Shivalik Small Finance Bank ने दिल्ली की ManiBhavnam Home Finance India Pvt Ltd को करीब ₹109 करोड़ में खरीद लिया है। इस सौदे से बैंक ने अफोर्डेबल हाउसिंग फाइनेंस (Affordable Housing Finance) के क्षेत्र में अपनी शुरुआत की है। यह सेगमेंट खासतौर पर कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों को लोन देने पर फोकस करता है।
लोन पोर्टफोलियो और ऑपरेशन पर असर
इस अधिग्रहण से Shivalik के मौजूदा लोन बुक में ₹320 करोड़ की संपत्ति जुड़ गई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के अंत तक, बैंक के एडवांसेज (Advances) ₹4,030 करोड़ थे, जबकि डिपॉजिट बेस ₹4,013 करोड़ था। इस तरह, बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो 99.6% रहा, जो दिखाता है कि बैंक अपने फंड का इस्तेमाल लेंडिंग ऑपरेशंस में कर रहा है। ManiBhavnam को इंटीग्रेट करके, बैंक सिक्योर्ड लेंडिंग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है, जिससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।
ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कैपिटल की ज़रूरतें
Shivalik बैंक आक्रामक ग्रोथ की राह पर है और हर साल लगभग 40% की ग्रोथ बनाए रखना चाहता है। इस ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए, बैंक अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए नई कैपिटल (Capital) जुटाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले, बैंक ने अगस्त 2025 में ₹100 करोड़ जुटाए थे, जिसमें SMBC Asia Rising Fund ने ₹60 करोड़ में 4.99% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस राउंड में Accel, Quona, Lightspeed और Sorin Investments जैसे पुराने निवेशकों ने भी हिस्सा लिया था।
एसेट क्वालिटी और सेक्टर का माहौल
मैनेजमेंट का कहना है कि बैंक की 90% मौजूदा लेंडिंग कोलैटरल (Collateral) द्वारा समर्थित है, और बचा हुआ असुरक्षित हिस्सा क्रेडिट गारंटी स्कीम्स (Credit Guarantee Schemes) से कवर होता है। सिक्योर्ड एसेट्स पर फोकस करने का मकसद जोखिम को कम करना है, जबकि बैंक अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में अपने ऑपरेशंस को बढ़ा रहा है। इस सेक्टर में बड़े बैंकों और स्पेशलाइज्ड हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। जैसे-जैसे बैंक का विस्तार होगा, निवेशक नए लोन बुक के इंटीग्रेशन और अधिग्रहण के बैंक की कैपिटल एडिक्वेसी (Capital Adequacy) और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले प्रभाव पर नज़र रखेंगे। भविष्य में बैंक की परफॉर्मेंस इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वह हाउसिंग फाइनेंस पोर्टफोलियो बढ़ाते हुए खराब लोन (Bad Loans) का स्तर कितना कम रख पाता है।
