अगर आपने अनजाने में अपना OTP किसी के साथ शेयर कर दिया है, तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत एक्शन लें। RBI की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंक को सूचित करें और साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन **1930** पर कॉल करें, ताकि आप अपनी जिम्मेदारी (Liability) को सीमित कर सकें और पैसे सुरक्षित रख सकें।
तुरंत क्या करें?
OTP साझा करना आपके फंड के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। घटना के तुरंत बाद के कुछ मिनट बहुत अहम होते हैं। Reserve Bank of India (RBI) के मौजूदा नियमों के मुताबिक, OTP शेयर करना अक्सर 'कस्टमर की लापरवाही' माना जाता है। लेकिन जैसे ही आप बैंक में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हैं, उसके बाद होने वाले अनधिकृत ट्रांजेक्शन (Unauthorized Transactions) की जिम्मेदारी बैंक की हो जाती है।
सबसे पहले अपने बैंक के 24x7 कस्टमर सपोर्ट को कॉल करें और अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग को तुरंत ब्लॉक करवा दें।
साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन का उपयोग
बैंक को बताने के बाद, तुरंत नेशनल साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। यह सिस्टम सीधे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से जुड़ा है, जो ठगों के अकाउंट में गए पैसों को फ्रीज करने में मदद करता है। यह कॉल कानूनी विवादों के लिए एक आधिकारिक रिकॉर्ड की तरह काम करेगी।
डिजिटल फुटप्रिंट को ऐसे करें सुरक्षित
- पासवर्ड रिसेट: अपने नेट बैंकिंग, UPI PIN और ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलें।
- स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स: ठगों के कहने पर इंस्टॉल किए गए किसी भी रिमोट स्क्रीन-शेयरिंग ऐप को तुरंत डिलीट करें।
- UPI सेटिंग्स: अनधिकृत UPI AutoPay मैंडेट या किसी नए डिवाइस रजिस्ट्रेशन की जांच करें।
- SIM स्वैपिंग: अगर अचानक मोबाइल नेटवर्क गायब हो जाए, तो तुरंत अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें।
अगर बैंक आपकी शिकायत का समाधान नहीं करता है, तो आप RBI Ombudsman के पास मामला ले जा सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि 1 जनवरी 2027 से नए नियम लागू होंगे, जिसके तहत बैंकों को फ्रॉड संबंधी शिकायतों को 45 दिन के भीतर सुलझाना अनिवार्य होगा।
