बॉन्डहोल्डर्स से मांगी गई विशेष छूट
SPG की पोर्टईस्ट इन्वेस्टमेंट यूनिट ने बॉन्ड होल्डर्स से Loan-to-Value (LTV) ratio के नियम में 3 महीने के लिए 34% से बढ़ाकर 40% करने की मांग की है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि एक साल में Tata Consultancy Services (TCS) के शेयर, जो पोर्टईस्ट बॉन्ड्स के लगभग आधे कोलैटरल का आधार हैं, 30% तक गिर चुके हैं। TCS के शेयर की वैल्यू में यह गिरावट भू-राजनीतिक घटनाओं और AI के IT सेवाओं पर संभावित प्रभाव के कारण बढ़ी है, जिससे SPG के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा हो गया है।
रीफाइनेंसिंग प्लान पर संकट
यह छूट SPG की सहायक कंपनी Goswami Infratech के लिए लगभग ₹28,000 करोड़ के कर्ज़ को रीफाइनेंस करने की योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। SPG पहले भी अपनी बड़ी देनदारियों को चुकाने के लिए संपत्तियों को बेचकर और ऊँची ब्याज दरों पर उधार लेकर संभालती रही है। Goswami Infratech ने 18.75% से 21.75% तक की यील्ड (Yield) वाले बॉन्ड्स जारी किए थे। ऐसे में, लोन की शर्तों का पालन करना बेहतर रीफाइनेंसिंग की शर्तों को सुरक्षित करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
बाजार की उथल-पुथल और SPG पर असर
मौजूदा बाजार का माहौल, खासकर ईरान युद्ध जैसे भू-राजनीतिक तनावों के कारण, इन मुश्किलों को और बढ़ा रहा है। भारत के शेयर बाजारों में गिरावट आई है, जिससे निवेशकों की ₹41 लाख करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति साफ हो गई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। SPG का यह छूट का अनुरोध इन व्यापक बाजार दबावों से पड़ रहे तात्कालिक प्रभाव को दिखाता है।
कर्ज़ का बोझ और कोलैटरल का जोखिम
SPG का कर्ज़, जो कभी ₹45,000 करोड़ के शिखर पर था, संपत्तियों की बिक्री के बाद अब लगभग ₹20,000 करोड़ रह गया है, लेकिन इसे अभी भी महत्वपूर्ण रीफाइनेंसिंग की आवश्यकता है। पोर्टईस्ट बॉन्ड्स 19.75% की ब्याज दर के साथ जारी किए गए थे, जो SPG द्वारा लिए गए कर्ज़ की भारी लागत को दर्शाते हैं। TCS, एक प्रमुख IT कंपनी, का शेयर हाल के समय में दबाव में रहा है। 27 मार्च 2026 तक, TCS लगभग ₹2,389.85 पर ट्रेड कर रहा था, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹8.65 लाख करोड़ था। इसका P/E रेश्यो 16.5 से 18.17 के बीच था, जो इसके 10-वर्षीय औसत से कम है। यह IT सेक्टर की व्यापक चुनौतियों और AI के संभावित विघटन के कारण निवेशक की चिंताओं को दर्शाता है।
SPG के लिए मुख्य जोखिम
SPG के लिए सबसे बड़ा जोखिम कोलैटरल के तौर पर विशिष्ट संपत्तियों पर इसकी निर्भरता है। इसके कर्ज़ का एक बड़ा हिस्सा Tata Sons में इसकी हिस्सेदारी से सुरक्षित है, जिसका अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग TCS जैसी संपत्तियों के माध्यम से पोर्टईस्ट इन्वेस्टमेंट द्वारा किया जाता है। यदि TCS के शेयर IT सेक्टर की समस्याओं या व्यापक बाजार के मुद्दों के कारण गिरते रहे, तो LTV अनुपात की सीमा टूट सकती है, जिससे इसके हाई-यील्ड बॉन्ड्स पर डिफ़ॉल्ट का खतरा बढ़ जाएगा।
भविष्य की राह
SPG की वित्तीय स्थिति न केवल बाजार के स्थिर होने पर निर्भर करती है, बल्कि Goswami Infratech के ₹28,000 करोड़ के कर्ज़ को अप्रैल 2026 तक सफलतापूर्वक रीफाइनेंस करने की उसकी क्षमता पर भी टिकी है। हालांकि हाल ही में भू-राजनीतिक चिंताओं के कम होने से बाजार में कुछ सुधार देखा गया है, लेकिन अंतर्निहित आर्थिक जोखिम अभी भी बने हुए हैं।