कर्ज चुकाने के लिए और समय की दरकार
Shapoorji Pallonji Group (SPG) की कंपनी Goswami Infratech ने ₹143 अरब ($1.5 अरब) के अपने ज़ीरो-कूपन नोट्स की मैच्योरिटी को 30 अप्रैल से बढ़ाकर जून के अंत तक टालने का अनुरोध किया है। यह मांग ग्रुप के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वे एक नए डॉलर बॉन्ड (dollar bond) की बिक्री और लोकल मार्केट से उधारी के ज़रिए इस डेट (debt) को रीफाइनेंस (refinance) करने की योजना बना रहे हैं।
रीफाइनेंसिंग प्लान पर बढ़ता दबाव
कंपनी का लक्ष्य अपने पहले डॉलर बॉन्ड ऑफरिंग से $1 अरब तक जुटाना है, और बाकी रकम लोकल मार्केट से आने की उम्मीद है। इस डेट के लिए मुख्य कोलेटरल (collateral) के तौर पर Tata Group की अनलिस्टेड होल्डिंग कंपनी Tata Sons में SPG की 18.4% हिस्सेदारी रखी गई है। हालांकि, हालिया मार्केट वोलेटिलिटी, जियोपॉलिटिकल टेंशन और रुपये के हेजिंग (hedging) की बढ़ती लागत ने इन फाइनेंसिंग एफर्ट्स को काफी जटिल बना दिया है।
Tata Sons की हिस्सेदारी का वैल्यूएशन बना रोड़ा
Shapoorji Pallonji Group की फाइनेंसियल स्ट्रेटेजी (financial strategy) काफी हद तक Tata Sons की हिस्सेदारी पर टिकी हुई है। इस होल्डिंग का वैल्यूएशन Tata Group की कंपनियों, खासकर Tata Consultancy Services (TCS) के परफॉरमेंस से सीधे तौर पर जुड़ा है। पिछले एक साल में TCS के शेयर 22.91% गिरे हैं, जो ब्रॉडर मार्केट और सेक्टर के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन है। इस गिरावट के चलते गिरवी रखी गई Tata Sons की शेयरों का वैल्यू कम हो गया है, जिससे SPG के रीफाइनेंसिंग प्रयासों पर दबाव और बढ़ गया है।
ऊंचे उधार की लागत और क्रेडिट पर दबाव
SPG का हाई-कॉस्ट डेट (high-cost debt) का इतिहास रहा है। मई 2025 में $3.4 अरब की एक फाइनेंसिंग डील हुई थी, जिसकी यील्ड (yield) 19.75% थी, जो काफी ज्यादा है। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग्स भी इस फाइनेंशियल स्ट्रेन (financial strain) को बयां करती हैं; हाल ही में ICRA ने Shapoorji Pallonji And Company Private Limited की रेटिंग को BBB-/A3 कर दिया था और आउटलुक (outlook) 'नेगेटिव' रखा है। भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अच्छी ग्रोथ की उम्मीदों के बावजूद, कॉर्पोरेट बॉरोइंग कॉस्ट (corporate borrowing costs) ग्लोबल रेट्स के अनुमानों के मुकाबले अभी भी प्री-पैंडेमिक लेवल से ऊपर बने हुए हैं।
मुख्य कोलेटरल की इलिक्विडिटी (Illiquidity)
एक प्रमुख रिस्क Tata Sons की हिस्सेदारी की इलिक्विडिटी (illiquidity) है। यह एक प्राइवेटली हेल्ड (privately held) एंटिटी है और इसके ट्रांसफर क्लॉज (transfer clauses) भी प्रतिबंधात्मक हैं। इसकी वैल्यू में होने वाले उतार-चढ़ाव से कोवनेंट ब्रीचेस (covenant breaches) हो सकते हैं, जिससे उधार लेने की लागत और बढ़ सकती है। SPG पर कुल कर्ज का अनुमान ₹55,000-60,000 करोड़ के बीच है। अपने कॉम्पिटिटर्स की तरह, जिनके पास ज़्यादा लिक्विड एसेट्स (liquid assets) होते हैं, SPG की मुख्य कोलेटरल एक प्राइवेट एंटिटी में फंसी हुई है, जिससे लिक्विडिटी मैनेजमेंट (liquidity management) एक बड़ी चुनौती बन गया है।
Tata Sons की लिस्टिंग से उम्मीद
SPG के चेयरमैन, Shapoor Mistry, Tata Sons की समय पर लिस्टिंग (listing) के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि एक IPO से कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance), ट्रांसपेरेंसी (transparency) में सुधार होगा और सबसे ज़रूरी, ग्रुप के भारी कर्ज के बोझ को कम करने के लिए लिक्विडिटी (liquidity) अनलॉक होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Tata Trusts के बीच इस मामले पर असहमति भी है। SPG की फाइनेंसिंग योजनाओं की सफलता, जिसमें डॉलर बॉन्ड की बिक्री भी शामिल है, मार्केट की डिमांड और Tata Sons की हिस्सेदारी से वैल्यू अनलॉक करने की प्रगति पर निर्भर करेगी।