Shapoorji Pallonji Group अपनी सब्सिडियरी Porteast Investment के **₹3,500 करोड़** के भुगतान को निपटाने के लिए नया डॉलर-डिनॉमिनेटेड कर्ज जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी ने इसके लिए **31 अक्टूबर** तक की मोहलत मांगी है, जो समूह की ऊंची ब्याज दरों वाले विदेशी कर्ज और इक्विटी कोलैटरल पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाती है।
कर्ज का बोझ और नई रणनीति
Shapoorji Pallonji (SP) Group फिलहाल अपने लिक्विडिटी दबाव को कम करने की कोशिश में है। ग्रुप ने अपनी सब्सिडियरी Porteast Investment के ₹3,500 करोड़ के बकाया भुगतान के लिए डेडलाइन को 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 अक्टूबर करने का औपचारिक अनुरोध किया है। यह कदम मौजूदा दायित्वों को रिफाइनेंस (Refinance) करने की एक कड़ी है।
टाटा संस के शेयरों का दांव
ग्रुप की योजना उसी फंडिंग स्ट्रक्चर को दोहराने की है जिसे जुलाई 2026 में Mercury Finance के जरिए अंजाम दिया गया था। उस डील में $650 मिलियन जुटाए गए थे, जिस पर 14.50% की यील्ड (Yield) थी। विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए ग्रुप ने टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी को कोलैटरल (Collateral) के तौर पर इस्तेमाल किया है। अब ग्रुप उसी पुराने बॉन्ड स्ट्रक्चर के बचे हुए हिस्से का उपयोग करके नया फंड जुटाने की तैयारी में है।
क्यों बना है दबाव?
आने वाले सालों में ग्रुप के सामने ₹50,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज मैच्योरिटी वॉल (Debt Maturity Wall) खड़ा है। टाटा ट्रस्ट्स के हालिया खुलासों के मुताबिक, SP Group ने टाटा संस में ₹25,000 करोड़ की हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव रखा है। यह विनिवेश (Divestment) कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए बहुत अहम माना जा रहा है।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मॉनिटरेबल पॉइंट यह है कि क्या यह हाई-कॉस्ट डेट स्ट्रक्चर लंबे समय तक सस्टेनेबल रहेगा। विदेशी बाजारों से बार-बार महंगे कर्ज लेना कंपनी के कैश फ्लो पर भारी दबाव का संकेत देता है। बाजार अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि विदेशी लेंडर्स इस नए डॉलर डेट इश्यू को किस तरह का रिस्पॉन्स देते हैं।
