Shapoorji Pallonji Group ने अपने हाई-यील्ड अनरेटेड बॉन्ड्स में निवेश की सीमा को **₹10 करोड़** से घटाकर **₹1 करोड़** कर दिया है। **3** साल की मैच्योरिटी वाले इस इंस्ट्रूमेंट पर **17.6%** का शानदार रिटर्न मिल रहा है, जो Tata Sons की हिस्सेदारी से सुरक्षित है।
निवेश का नया मौका
Shapoorji Pallonji Group ने हाई-नेट-वर्थ निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अपने EquiZen Investments नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में एंट्री आसान कर दी है। पहले जहाँ न्यूनतम निवेश ₹10 करोड़ था, वहीं अब इसे घटाकर ₹1 करोड़ कर दिया गया है। गौरतलब है कि ये बॉन्ड्स अनलिस्टेड और अनरेटेड हैं, जिसका मतलब है कि इनका रिस्क प्रोफाइल सामान्य कॉर्पोरेट डेट की तुलना में अधिक हो सकता है।
बॉन्ड का गणित और सुरक्षा
3 साल की मैच्योरिटी वाले इन बॉन्ड्स पर कंपनी 17.6% का सालाना यील्ड ऑफर कर रही है। यह इश्यू कुल ₹21,350 करोड़ का है। सुरक्षा के लिए कंपनी ने इसमें लोन-टू-वैल्यू (LTV) की शर्त रखी है, जो 22.1% है। यदि यह अनुपात लगातार 5 दिनों तक 40% से ऊपर जाता है, तो कंपनी को 20 दिनों के भीतर अतिरिक्त कोलैटरल देना होगा।
Tata Sons की हिस्सेदारी का सहारा
इन बॉन्ड्स को Cyrus Investments के जरिए Tata Sons में मौजूद 9.185% हिस्सेदारी का बैकअप मिला है। इसके अलावा, Afcons Infrastructure के शेयर्स और अन्य एसेट्स को भी कोलैटरल के तौर पर रखा गया है। निवेशकों के लिए Tata Sons की हिस्सेदारी की वैल्यू सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही इस पूरे कर्ज की सुरक्षा तय करती है।
कर्ज चुकाने का प्लान
कंपनी का मुख्य मकसद इस फंड से पुराने कर्ज को री-फाइनेंस करना है। लगभग ₹17,500 करोड़ से ₹17,800 करोड़ का उपयोग Goswami Infratech और Capespan NCO जैसे कर्जदारों का भुगतान करने के लिए किया जाएगा। साथ ही, अगले 24 महीनों में ₹11,275 करोड़ का कर्ज कम करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे एसेट सेल्स या Tata Sons की हिस्सेदारी को मोनेटाइज करके पूरा किया जा सकता है।
