UPI के जरिए गलत अकाउंट में पैसे ट्रांसफर होने पर कोई 'ऑटोमैटिक रिवर्सल' बटन नहीं होता। ऐसे में तुरंत बैंक को सूचित करना और आधिकारिक चैनल का इस्तेमाल करना ही एकमात्र रास्ता है। जानें पूरा प्रोसेस।
तत्काल एक्शन क्यों है जरूरी?
UPI ट्रांजैक्शन की सबसे बड़ी खूबी इसकी रफ़्तार है, लेकिन यही रफ़्तार गलती होने पर सिरदर्द बन जाती है। याद रखें, एक बार पेमेंट ऑथोराइज होने के बाद पैसा सीधे सामने वाले के खाते में पहुंच जाता है। चूंकि UPI में कोई 'अनडू' (Undo) बटन नहीं है, इसलिए पैसा वापस पाना पूरी तरह से सामने वाले व्यक्ति की सहमति पर निर्भर करता है।
रिकवरी का सही रास्ता
- बैंक को बताएं: सबसे पहले अपने बैंक के कस्टमर सपोर्ट से संपर्क करें और Transaction Reference Number (या UTR) जरूर बताएं। आपका बैंक दूसरे बैंक को डिस्प्यूट (Dispute) रेज करेगा।
- NPCI और Ombudsman: अगर सामने वाला व्यक्ति पैसे लौटाने से मना करता है, तो आप NPCI के पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं। अगर 30 दिन तक समाधान नहीं होता, तो RBI Integrated Ombudsman के पास मामला ले जाने का विकल्प खुला रहता है।
टेक्निकल फेल्योर vs यूजर की गलती
अगर पैसा आपके खाते से कट गया लेकिन सामने वाले को नहीं मिला, तो यह 'टेक्निकल एरर' है। RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक, ऐसे मामलों में पैसा 1 से 5 दिनों के भीतर अपने आप रिफंड हो जाता है, इसके लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है।
स्कैमर्स से रहें सावधान!
गलत ट्रांजैक्शन के बाद आपको फोन कॉल आ सकते हैं, जिसमें खुद को बैंक अधिकारी बताकर लोग आपकी UPI PIN या OTP मांग सकते हैं। याद रखें, कोई भी बैंक रिफंड के लिए आपसे पिन नहीं मांगता। अपनी डिटेल्स किसी के साथ शेयर न करें, वरना आप दूसरी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि ट्रांजैक्शन फ्रॉड है, तो तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें।
