स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFBs) वरिष्ठ नागरिकों को **8.3%** तक का ब्याज दे रहे हैं, जबकि बड़े प्राइवेट बैंक **7.75%** पर ही सीमित हैं। निवेशकों को छोटी बैंकों की ऊंची ब्याज दरों और बड़ी बैंकों के बड़े नेटवर्क के बीच संतुलन बनाना होगा। टैक्स बचाने के लिए सीनियर सिटीजन फॉर्म **15H** जमा कर सकते हैं।
क्या हुआ?
जुलाई 2026 की शुरुआत तक, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर रिटर्न की तलाश कर रहे वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) और बड़े प्राइवेट बैंकों के बीच ब्याज दरों का एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। Jana Small Finance Bank जैसी छोटी संस्थाएं फिलहाल तीन साल की अवधि के लिए 8.3% तक की ब्याज दरें दे रही हैं। वहीं, Yes Bank, Kotak Mahindra Bank, ICICI Bank, और HDFC Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंक वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7% से 7.75% के बीच की ब्याज दरें दे रहे हैं, जो कि अवधि और बैंक पर निर्भर करता है।
ब्याज दरों का परिदृश्य
प्राइवेट बैंकों में, Yes Bank कुछ अवधियों जैसे 18 से 24 महीने और 36 से 60 महीनों के लिए 7.75% तक की पेशकश कर रहा है। Kotak Mahindra Bank 2 से 3 साल के डिपॉजिट के लिए 7.3% तक की दर दे रहा है। ICICI Bank 3 साल 1 दिन से 5 साल की अवधि के लिए 7.1% तक की पेशकश करता है, जबकि HDFC Bank की दरें वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7% के आसपास हैं। ये दरें आमतौर पर वह 0.50% का अतिरिक्त प्रीमियम भी शामिल करती हैं जो बैंक सामान्य ग्राहकों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों को देते हैं।
रिटर्न और जोखिम का संतुलन
इन विकल्पों में से चुनते समय, निवेशक अक्सर SFBs के उच्च रिटर्न की तुलना बड़ी बैंकों की स्थिरता से करते हैं। जहां SFBs आकर्षक रिटर्न देते हैं, वहीं वे अक्सर विशेष ग्राहक वर्गों की सेवा करते हैं और बड़े बैंकों की तुलना में उनका शाखा नेटवर्क छोटा होता है। जमाकर्ताओं के लिए यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, जिनमें SFBs भी शामिल हैं, में ₹5 लाख प्रति जमाकर्ता तक की जमा राशि DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) द्वारा बीमित होती है। इस सीमा से अधिक राशि जमा करने वाले अक्सर कई संस्थानों में पैसा फैलाना या कम जोखिम वाले माने जाने वाले बड़े बैंकों में निवेश करना पसंद करते हैं।
टैक्स नियमों को समझना
फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज कर योग्य होता है, और यदि ब्याज आय ₹1 लाख प्रति फाइनेंशियल ईयर से अधिक हो जाती है, तो बैंकों को TDS (Tax Deducted at Source) काटना होता है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिक यह कटौती रोकने के लिए अपने बैंक में फॉर्म 15H जमा कर सकते हैं, बशर्ते उनकी अनुमानित कुल वार्षिक टैक्स देनदारी शून्य के करीब हो। मौजूदा टैक्स नियमों के अनुसार, नए टैक्स रिजीम के तहत ₹12 लाख तक कमाने वालों के लिए उपलब्ध छूट को ध्यान में रखते हुए, कई वरिष्ठ नागरिक इस छूट के पात्र हो सकते हैं। इससे उन्हें बाद में रिफंड का दावा किए बिना पूरा ब्याज मिल सकेगा।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बैंकों के बीच चयन करते समय, निवेशकों को विशिष्ट अवधियों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि बैंक अपनी लिक्विडिटी की जरूरतों को प्रबंधित करने के लिए विभिन्न परिपक्वता अवधियों के लिए दरों को अक्सर समायोजित करते हैं। इसके अलावा, SFBs को चुनते समय, बैंक की नवीनतम क्रेडिट रेटिंग और पूंजी पर्याप्तता अनुपात (capital adequacy ratios) की जांच करना समझदारी होगी, जो उनकी वित्तीय सेहत की जानकारी देते हैं। अंत में, वरिष्ठ नागरिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका KYC (Know Your Customer) अपडेटेड हो ताकि फॉर्म 15H को सुचारू रूप से जमा करने और अनावश्यक टैक्स संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके।
