सेबी छोटी कंपनियों के बढ़ने के साथ एमएफ कैप ओवरहाल पर विचार कर रहा है

BANKINGFINANCE
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AuthorNeha Patil|Published at:
सेबी छोटी कंपनियों के बढ़ने के साथ एमएफ कैप ओवरहाल पर विचार कर रहा है
Overview

भारत के बाज़ार नियामक, सेबी, म्यूचुअल फंड मार्केट कैपिटलाइज़ेशन क्लासिफिकेशन नियमों को संशोधित करने के लिए तैयार है। 2017 में बने मौजूदा नियम अब स्मॉल-कैप स्टॉक वैल्यू में भारी वृद्धि को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं। मोतीलाल ओसवाल निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स फंड ने सेबी की स्पष्टता लंबित रहने तक इनफ्लो रोक दिया है, जो इसकी तात्कालिकता को उजागर करता है। नियामक का लक्ष्य इन श्रेणियों को परिष्कृत करके तरलता (liquidity) पर निवेशकों की चिंताओं को दूर करना और दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करना है।

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पुराने नियमों की जांच

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप इक्विटी योजनाओं के वर्गीकरण मानदंडों को ओवरहाल करने की तैयारी कर रहा है। 2017 में पहली बार लागू किए गए ये नियम, छोटी कंपनियों के मार्केट कैप में पर्याप्त विस्तार को देखते हुए, अब पुराने पड़ गए हैं। इस स्थिति ने म्यूचुअल फंड हाउसेस के बीच निवेश जनादेश (investment mandates) और निवेशक स्पष्टता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

मोतीलाल ओसवाल ने इनफ्लो रोके

इसी महीने, मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने अपने मोतीलाल ओसवाल निफ्टी माइक्रोकैप 250 इंडेक्स फंड में ताज़ा इनफ्लो रोके। यह निर्णय सेबी के साथ हुई चर्चाओं के बाद आया, जिसमें फंड की रणनीति को मौजूदा वर्गीकरण नियमों के साथ संरेखित करने पर बात हुई, जो माइक्रो-कैप को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता नहीं देते हैं। जून 2023 में लॉन्च हुए इस फंड ने जनवरी की शुरुआत तक लगभग ₹2,600 करोड़ की संपत्ति जमा कर ली थी, जो टॉप 500 स्टॉक्स से परे निवेश करता था।

मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में तीव्र वृद्धि

वेंचुरा के एक अध्ययन से पता चलता है कि सूचीबद्ध ब्रह्मांड (listed universe) के निचले दशमांश (lower deciles) में कंपनियों ने सबसे तेज़ औसत मार्केट कैपिटलाइज़ेशन कंपाउंडिंग दिखाई है। जून 2020 से जून 2025 के बीच, मार्केट कैप के हिसाब से 251वें स्थान पर रहे स्टॉक 4.4 गुना बढ़े, 500वें स्थान वाले 6.1 गुना, और 750वें स्थान वाले 7.3 गुना बढ़े। नवंबर 2025 तक लगभग 83% स्मॉल-कैप फंड पोर्टफोलियो टॉप 750 स्टॉक्स में निवेशित हैं, जिसमें कोर स्मॉल-कैप सेगमेंट (रैंक 251-750) 63% है।

लिक्विडिटी चिंताएं और निवेशक धारणा

उद्योग के प्रतिभागियों का कहना है कि नियामक की चिंता माइक्रोकैप स्टॉक्स को लेकर है जो निवेशकों को तेजी से बढ़ते लाभ (rapid upside) से आकर्षित करते हैं, और फिर बाज़ार में गिरावट (downturns) के दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी कमी का सामना करते हैं। मोतीलाल ओसवाल में ईटीएफ (ETFs) और इंडेक्स फंड के प्रमुख प्रतीक ओसवाल ने तर्क दिया है कि आज के माइक्रोकैप्स में कुछ साल पहले के स्मॉल कैप्स की तुलना में काफी अधिक लिक्विडिटी है। उनका मानना है कि फंड बिना किसी लिक्विडिटी समस्या के आराम से अपने वर्तमान आकार से आगे बढ़ सकते हैं।

वर्गीकरण पर उद्योग के विचार

वेंचुरा के निदेशक जुज़र गबाजिवाला ने बताया कि कई स्टॉक जिन्हें निवेशक लार्ज- या मिड-कैप मानते हैं, वे एएमएफआई (AMFI) वर्गीकरण के अनुसार अभी भी स्मॉल-कैप माने जाते हैं। उन्होंने सीडीएसएल (CDSL), जिलेट इंडिया (Gillette India), एनबीसीसी (NBCC), पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस (PNB Housing Finance), वोकहार्ट (Wockhardt), ईस्ट इंडिया होटल्स (East India Hotels), एंजल वन (Angel One), और टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) जैसे उदाहरण दिए, जिन्हें निवेशक अक्सर उनकी आधिकारिक स्मॉल-कैप स्थिति से ऊपर वर्गीकृत करते हैं। दिसंबर 2024 और नवंबर 2025 के बीच स्मॉल-कैप फंडों ने लगभग -2.4% का नकारात्मक रिटर्न दिया, इसके बावजूद इस श्रेणी में ₹53,165 करोड़ का शुद्ध इनफ्लो आया, जो दीर्घकालिक क्षमता में विश्वास को दर्शाता है।

सेबी का आगे का रास्ता

सेबी कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार ने दीर्घकालिक व्यवहार्य वर्गीकरण बनाने की चुनौती को स्वीकार किया। माइक्रो-कैप श्रेणी शुरू करने का सुझाव दिया गया है, लेकिन सेबी ने हाल के मामलों में सावधानी दिखाई है। नियामक का लक्ष्य एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जो दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा दे, भले ही वह तुरंत सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत न हो। उद्योग के प्रतिभागियों का सुझाव है कि वर्गीकरण मानदंडों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करना चाहिए और केवल स्टॉक की संख्या के बजाय एक प्रतिशत (percentile) विधि का उपयोग करना चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.