Q3 FY26 के दमदार नतीजे: मुनाफे में शानदार वापसी
Sammaan Capital Limited (जो पहले Indiabulls Housing Finance के नाम से जानी जाती थी) ने Q3 FY26 के लिए अपने नतीजे जारी किए हैं, जिसमें कंपनी ने पिछले साल के मुकाबले एक बड़ी वित्तीय वापसी की है। 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) ₹314 करोड़ रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही में दर्ज ₹302 करोड़ से मामूली बढ़त दर्शाता है।
हालांकि, असली तस्वीर 9 महीनों के नतीजों में सामने आई है। इस अवधि में कंपनी का PAT ₹957 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में हुए ₹2,132 करोड़ के कंसोलिडेटेड नुकसान की तुलना में एक मजबूत सुधार है।
कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) भी स्थिर बनी हुई है, जिसमें ग्रॉस एनपीए (Gross NPAs) 1.2% पर और नेट एनपीए (Net NPAs) 0.7% पर कायम हैं। कंपनी का नेट वर्थ (Net worth) एक साल में लगभग ₹2,000 करोड़ बढ़कर अब ₹22,423 करोड़ हो गया है, जो ₹44,000 करोड़ के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को सपोर्ट कर रहा है। कंपनी का गियरिंग (Gearing) 2.2x पर स्थिर बना हुआ है।
रणनीतिक कदम: मर्जर और IHC इन्वेस्टमेंट
Sammaan Capital अपनी सब्सिडियरी Sammaan Finserve को खुद में मर्ज करने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इस मर्जर (Merger) का मुख्य उद्देश्य Sammaan Capital को एक फुल-सूइट NBFC के रूप में स्थापित करना है, जिससे यह ग्राहकों को मॉर्गेज-बैक्ड लोन के साथ-साथ मिड-मार्केट और लो-इनकम सेगमेंट के लिए अन्य लोन एसेट्स भी ऑफर कर सके।
एक और बड़ा डेवलपमेंट IHC (International Holding Company) के साथ होने वाले प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट (Preferential Allotment) को लेकर है। कंपनी ने बताया है कि शेयरहोल्डर (Shareholder) और कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) से आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है। अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और सेबी (SEBI) से अंतिम क्लीयरेंस (Clearance) का इंतजार है, जो जल्द ही मिलने की उम्मीद है, जिससे यह डील अपने अंतिम चरण में है।
PIL पर अपडेट और भविष्य की राह
मैनेजमेंट ने पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) के मुद्दे पर भी विस्तार से बात की। कंपनी ने जोर देकर कहा कि Sammaan Capital पूर्व प्रमोटर से जुड़े कथित 'क्विड प्रो क्वो' (quid pro quo) ट्रांजैक्शन्स का शिकार हुई है और उसे कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है। कंपनी का दावा है कि विवादित लोन से उनका कोई प्रिंसिपल एक्सपोजर (Principal Exposure) नहीं है, बल्कि उन्होंने इन लोन्स से ₹3,000 करोड़ से ज्यादा का इंटरेस्ट इनकम कमाया है। यह भी बताया गया कि सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसे रेगुलेटरी बॉडीज़ (Regulatory bodies) की एफिडेविट्स (Affidavits) में सरकारी फंड के किसी नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। मैनेजमेंट को पूरा भरोसा है कि IHC इन्वेस्टमेंट प्रक्रिया इन कानूनी मामलों को ध्यान में रखकर ही आगे बढ़ रही है।
भविष्य की बात करें तो, कंपनी 2030 तक अपने लेवरेज (Leverage) को 4x से 4.5x तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, ताकि एक डाइवर्सिफाइड NBFC के तौर पर काम कर सके। इन्वेस्टमेंट पूरा होने के एक साल के भीतर 30-40% पेआउट रेश्यो (Payout ratio) के साथ डिविडेंड (Dividend) शुरू करने की भी योजना है। अगले 9-12 महीनों में फंड की लागत (Cost of funds) में 270 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कमी आने का अनुमान है, जिससे यह 8% से नीचे आ सकती है।
कंपनी डिजिटल ऑनबोर्डिंग, अंडरराइटिंग और डिस्बर्सल के लिए टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही है। साथ ही, पुराने लोन बुक को खत्म करने की दिशा में प्रगति करते हुए अगले तीन सालों में करीब ₹4,500 करोड़ की नेट रिकवरी (Net recoveries) का अनुमान है। इन्वेस्टमेंट के बाद अगले दो फाइनेंशियल इयर्स में 400-500 शहरों में ब्रांच नेटवर्क (Branch network) का विस्तार करने की भी योजना है।