कर्जदाताओं का बड़ा दांव: डेट को इक्विटी में बदला
Sadbhav Engineering के भविष्य को लेकर उसके कर्जदाताओं ने एक अहम कदम उठाया है। कंपनी को नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) यानी इंडिया की बैड बैंक को बेचने के बजाय, ₹1,517 करोड़ के एक जटिल डेट रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को मंजूरी दी गई है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के नेतृत्व वाले इस कंसोर्टियम ने यह फैसला लिया है, जो कंपनी में एक संभावित बदलाव (Turnaround) की उम्मीद जगाता है।
डील की पूरी कहानी: कर्ज से इक्विटी का सफर
इस प्लान के तहत, ₹906 करोड़ के लोन और उस पर मिले ब्याज को कनवर्टिबल डिबेंचर और इक्विटी में बदला जाएगा। साथ ही, प्रमोटरों के कर्ज को भी इक्विटी में तब्दील किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनी की देनदारियों (Liabilities) को काफी हद तक कम करना है। यह डील 31 मार्च, 2026 तक पूरी हो जाएगी। कर्जदाताओं ने NARCL के लगभग ₹371 करोड़ के ऑफर को ठुकरा दिया, ताकि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में लंबी कानूनी लड़ाई से बचा जा सके।
कमजोर वित्तीय स्थिति और सेक्टर की रफ्तार
Sadbhav Engineering की वित्तीय हालत इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बाकी बड़ी कंपनियों के मुकाबले कमजोर नजर आती है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Capitalisation) लगभग ₹137 करोड़ है, जो KNR Constructions (₹3,400+ करोड़), PNC Infratech (₹4,400+ करोड़) और Dilip Buildcon (₹6,500+ करोड़) जैसी कंपनियों का एक छोटा सा हिस्सा है। SEL का P/E रेश्यो (-1.26) नेगेटिव है, जो लगातार घाटे को दर्शाता है, जबकि इसके प्रतिस्पर्धियों का P/E रेश्यो 4 से 30 के बीच पॉजिटिव है। कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.42 है, जो काफी ज्यादा है, और भारी कर्ज के कारण इक्विटी नेगेटिव भी हो सकती है, वहीं Competitors लगभग बिना कर्ज के हैं।
पुरानी परेशानियां और शेयर का रिएक्शन
हालांकि, भारतीय कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सरकार के खर्च के कारण FY2026 में 7-7.5% की मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है, लेकिन Sadbhav Engineering की अपनी वित्तीय परेशानियां इसे इस ग्रोथ का फायदा उठाने से रोक रही हैं। कंपनी पहले अप्रैल 2024 में परिचालन बकाए (Operational Dues) को लेकर इंसॉल्वेंसी (Insolvency) की कार्यवाही का सामना कर चुकी है, जिसे बाद में सुलह के बाद NCLAT ने रद्द कर दिया था।
खबर के बाद, 4 अप्रैल, 2026 को शेयर का भाव ₹8.04 के आसपास रहा और पिछले क्लोजिंग प्राइस से 4.96% की मामूली बढ़त देखी गई। यह मार्केट की तरफ से एक सतर्क प्रतिक्रिया है। शेयर का 1 साल का रिटर्न लगभग -26.64% रहा है।
भविष्य के जोखिम और उम्मीदें
इस रीस्ट्रक्चरिंग के बावजूद, कंपनी के सामने बड़े जोखिम बने हुए हैं। भविष्य में कंपनी के प्रदर्शन और नए कर्ज के प्रबंधन पर सब कुछ निर्भर करेगा। कर्जदाताओं के पास अब बोर्ड में अपने नॉमिनी डायरेक्टर नियुक्त करने का अधिकार भी होगा, जिससे वे कंपनी पर अधिक नियंत्रण रख सकेंगे। अगर यह रीस्ट्रक्चरिंग प्लान फेल होता है, तो कंपनी को NCLT का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी की उम्मीदें मैनेजमेंट के कार्यान्वयन (Execution) और कर्जदाताओं की निगरानी पर टिकी हैं।