STT बढ़ोतरी का सरकार का मकसद बनाम बाजार की चिंता
आम बजट 2026 में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में की गई बड़ी बढ़ोतरी ने बाजार में हलचल मचा दी है। Zerodha के फाउंडर और CEO, Nithin Kamath, इस कदम के खिलाफ मुखर हो गए हैं। सरकार का कहना है कि इस टैक्स से सिस्टमैटिक रिस्क (systemic risk) को मैनेज करने और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी, लेकिन Kamath का तर्क है कि यह बढ़ोतरी असल मकसद में कामयाब नहीं होगी।
टैक्स में कितनी बढ़ोतरी और कब से लागू?
यह नया टैक्स 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा। इसके तहत, फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम पर यह 0.1% से बढ़कर 0.15% कर दिया गया है। बजट के ऐलान के बाद शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई थी।
Nithin Kamath का तर्क: ऑप्शन ट्रेडिंग की तरफ ज्यादा झुकाव?
Kamath का सबसे बड़ा तर्क यह है कि मौजूदा समय में F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम का करीब 95% हिस्सा ऑप्शंस में होता है। ऐसे में, फ्यूचर्स पर ज्यादा असर डालने वाले टैक्स बढ़ोतरी से सट्टेबाजी पर खास फर्क नहीं पड़ेगा, बल्कि यह ट्रेडर को और ज्यादा ऑप्शंस की ओर ही धकेलेगा। उनका कहना है कि लगातार बढ़ते ट्रांजैक्शन कॉस्ट (transaction cost) से ट्रेडिंग करना मुश्किल हो जाएगा और कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। आपको बता दें कि Zerodha जैसी कंपनियों के लिए STT कलेक्शन पहले से ही उनके ब्रोकरेज रेवेन्यू से ज्यादा है, जो बताता है कि एक्टिव ट्रेडर्स पर टैक्स का कितना बड़ा बोझ है।
ऐतिहासिक सीख और वैकल्पिक सुझाव
यह कोई पहला मौका नहीं है जब STT ने ट्रेडिंग पैटर्न को प्रभावित किया हो। साल 2008 में जब ऑप्शंस पर STT को कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू की जगह प्रीमियम पर लगाया गया था, तब से ऑप्शंस ट्रेडिंग फ्यूचर्स के मुकाबले काफी सस्ती हो गई थी और इसी वजह से ऑप्शंस का तेजी से विकास हुआ। Kamath का सुझाव है कि STT में बार-बार बढ़ोतरी करने के बजाय, प्रोडक्ट सूटेबिलिटी नॉर्म्स (product suitability norms) लागू किए जाने चाहिए। इससे यह तय होगा कि कौन से ट्रेडर कॉम्प्लेक्स डेरिवेटिव्स के लिए एलिजिबल हैं। उनका मानना है कि यह सट्टेबाजी को रोकने का ज्यादा बेहतर और टारगेटेड तरीका होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कैश इक्विटी (cash equity) और फ्यूचर्स पर STT कम करके और इंट्राडे लीवरेज (intraday leverage) बढ़ाकर मार्केट एक्टिविटी को री-बैलेंस किया जा सकता है।
बाजार और ब्रोकिंग फर्मों पर असर
इस STT बढ़ोतरी का असर सिर्फ ट्रेडर्स पर ही नहीं, बल्कि ब्रोकिंग फर्म्स और एक्सचेंज पर भी पड़ेगा, जिनका रेवेन्यू F&O ट्रेडिंग पर निर्भर करता है। BSE और Angel One जैसी कंपनियों पर इसका खास असर दिख सकता है। सरकार को उम्मीद है कि FY27 तक STT से ₹73,700 करोड़ का कलेक्शन होगा। हालांकि, बाजार के जानकारों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह बढ़ा हुआ ट्रांजैक्शन कॉस्ट ट्रेडिंग एक्टिविटी को धीमा कर देगा या ट्रेडर नए तरीके अपना लेंगे। सरकार का फोकस हाई-फ्रीक्वेंसी और शॉर्ट-टर्म डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कंट्रोल करने पर है, न कि लॉन्ग-टर्म इक्विटी इन्वेस्टिंग पर।