STT Hike का असर: कैपिटल मार्केट्स पर गिरी गाज, Angel One और BSE के शेयर धड़ाम!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
STT Hike का असर: कैपिटल मार्केट्स पर गिरी गाज, Angel One और BSE के शेयर धड़ाम!
Overview

शुक्रवार को कैपिटल मार्केट्स से जुड़े स्टॉक्स पर दबाव देखा गया, जिसमें Angel One और BSE के शेयर प्रमुख रूप से गिरे। इस गिरावट की वजह हाल में बढ़ा हुआ सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और NSE के CEO द्वारा फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग वॉल्यूम में संभावित कमी को लेकर जताई गई चिंता है।

मेन वजह क्या है?

शुक्रवार को निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स 1.5% नीचे आ गया, जो इस सेक्टर में व्यापक कमजोरी को दर्शाता है। इंडेक्स के 15 में से 13 स्टॉक्स लाल निशान में थे। Angel One के शेयर 4% से ज्यादा गिरकर ₹235.60 के इंट्राडे लो पर पहुंच गए, जो पिछले दो दिनों की गिरावट को मिलाकर लगभग 5% हो गया। BSE के शेयर भी 2% तक फिसल गए। यह बड़ी गिरावट बजट 2026 में प्रस्तावित STT दरों में बढ़ोतरी और NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, Ashishkumar Chauhan द्वारा फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) वॉल्यूम में संभावित कमी की चेतावनी का सीधा असर है।

गहराई से समझें पूरा मामला

बजट 2026 में 1 अप्रैल, 2026 से STT दरों में काफी बढ़ोतरी की गई है: फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो गया, और ऑप्शंस प्रीमियम व एक्सरसाइज पर 0.1% और 0.125% से बढ़कर क्रमशः 0.15% हो गया। इससे ट्रांजैक्शन कॉस्ट बढ़ जाएगी, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स के लिए। उदाहरण के लिए, ₹10 लाख के एक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर अब प्रति कॉन्ट्रैक्ट अतिरिक्त ₹300 STT लगेगा।

इसके साथ ही, NSE के CEO Ashishkumar Chauhan ने सिंगापुर और अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अनुरूप डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए "मिनिमम क्वालिफाइंग क्राइटेरिया" (न्यूनतम योग्यता मानदंड) का प्रस्ताव दिया है। यह रेगुलेटरी कदम कम आय वर्ग के लोगों की सट्टेबाजी वाली भागीदारी को कम करने के लिए है, क्योंकि SEBI के आंकड़ों के अनुसार 90% से अधिक डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स नुकसान उठाते हैं। टैक्स में बढ़ोतरी और एंट्री बैरियर बढ़ाने के इस दोहरे कदम का मकसद बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी को रोकना है।

Angel One, जो 7.53 मिलियन एक्टिव यूजर्स और अक्टूबर 2024 तक 15.64% मार्केट शेयर के साथ एक प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर है, के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। इसका रेवेन्यू मॉडल काफी हद तक ट्रेडिंग वॉल्यूम, खासकर F&O सेगमेंट पर निर्भर करता है। नवंबर 2025 में Angel One का F&O एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) महीने-दर-महीने 10.1% गिर गया था। एक्सचेंज ऑपरेटर BSE का रेवेन्यू भी सीधे ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ा है।

ऐतिहासिक रूप से, रेगुलेटरी बदलावों का इन कंपनियों पर असर पड़ा है; Angel One के शेयर जुलाई 2025 में कमजोर बिजनेस अपडेट और टाइट F&O रेगुलेशन के बाद 5.53% गिरे थे।

भविष्य को लेकर चुनौतियां

यह रेगुलेटरी माहौल Angel One और BSE जैसे कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज के मौजूदा बिजनेस मॉडल के लिए एक बड़ी स्ट्रक्चरल चुनौती पेश करता है। STT में बढ़ोतरी, जिसका मकसद सरकारी राजस्व बढ़ाना और सट्टेबाजी को रोकना है, सीधे तौर पर ट्रेडिंग की लागत बढ़ाती है, जिससे ब्रोकरेज और एक्सचेंजों के लिए आय के स्रोत वाले कुल वॉल्यूम में कमी आ सकती है। NSE पर इक्विटी ऑप्शंस टर्नओवर का 50% से अधिक हिस्सा रखने वाली प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग फर्म्स विशेष रूप से प्रभावित होंगी।

इसके अलावा, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग क्राइटेरिया के प्रस्ताव से एक्टिव पार्टिसिपेंट्स का आधार काफी कम हो सकता है। यह Angel One जैसे ब्रोकर्स के लिए सीधा खतरा है, जिनकी ग्रोथ एक बड़े रिटेल बेस को आकर्षित करके हुई है।

हालांकि Angel One की लॉन्ग-टर्म फंडामेंटल्स मजबूत हैं, जिसमें लॉन्ग-टर्म में 38.34% नेट सेल्स ग्रोथ और 37.53% ऑपरेटिंग प्रॉफिट ग्रोथ देखी गई है, हाल की तिमाही नतीजों में गिरावट आई है। पिछले एक साल में इसका मुनाफा 40.6% सिकुड़ गया और दिसंबर 2025 में समाप्त नौ महीनों में नेट सेल्स 20.55% गिर गई। इसी तरह, BSE का वैल्यूएशन, जिसका P/E रेश्यो लगभग 58x है, पर तब असर पड़ सकता है जब ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट आए। BSE पर कोई कर्ज नहीं है और इसकी रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत है, लेकिन ट्रांजैक्शन फीस पर इसकी निर्भरता वॉल्यूम में लगातार गिरावट के प्रति इसे संवेदनशील बनाती है।

प्रस्तावित रेगुलेटरी कदम ट्रेडिंग वॉल्यूम को बढ़ावा देने के बजाय बाजार की स्थिरता और निवेशक सुरक्षा की ओर एक बदलाव का संकेत देते हैं, जिससे इन कंपनियों के मार्जिन में लंबे समय तक दबाव बना रह सकता है।

विश्लेषकों का नजरिया

Angel One के लिए विश्लेषकों की राय अभी भी काफी हद तक पॉजिटिव है, जिसमें कंसेंसस "Buy" रेटिंग और ₹306.10 का औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट है, जो 24% से अधिक की संभावित अपसाइड दिखाता है। BSE के लिए, कंसेंसस "Buy" या "Hold" की ओर झुकाव रखता है, जिसका औसत प्राइस टारगेट लगभग ₹3,114.62 है, जो लगभग 11% की अपसाइड का संकेत देता है।

हालांकि, ये टारगेट नए रेगुलेटरी व्यवस्था के संभावित लॉन्ग-टर्म असर और ट्रेडिंग वॉल्यूम व रेवेन्यू स्ट्रीम पर इसके प्रभाव को पूरी तरह से शायद नहीं दर्शाते हों। आज बाजार की प्रतिक्रिया तात्कालिक चिंताओं को दर्शाती है, लेकिन इसका स्थायी प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ये कंपनियां हाई-फ्रीक्वेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से परे अपने रेवेन्यू को कितनी प्रभावी ढंग से विविध (diversify) कर पाती हैं।

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