SPML Infra ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए प्रमोटरों से ₹190 करोड़ से ज्यादा की रकम जुटाई है। यह फंड प्रमोटर की हिस्सेदारी, प्रीफरेंशियल इश्यू और डेट के इक्विटी में बदलने के ज़रिए आया है। मशहूर निवेशक विजय केडिया ने भी वारंट अलॉटमेंट के ज़रिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर लगभग 3% कर ली है। इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी पानी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में किया जाएगा।
Detailed Coverage
SPML Infra जुटाएगी ₹190 करोड़ से ज़्यादा
पानी और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करने वाली SPML Infra ने ₹190 करोड़ से ज़्यादा की पूंजी जुटाने का प्लान बनाया है। कंपनी यह फंड कई तरीकों से जुटा रही है, जिसमें प्रमोटरों से पैसा लेना, नॉन-प्रमोटरों को प्रीफरेंशियल इश्यू देना और पुराने डेट को इक्विटी में बदलना शामिल है।
प्रमोटरों का बड़ा योगदान
कंपनी के प्रमोटर ₹177 करोड़ से ज़्यादा का निवेश कर रहे हैं। इस पैसे से कंपनी अपने मौजूदा एक्सपेंशन और ग्रोथ की स्ट्रेटेजी को सपोर्ट करेगी। इसके अलावा, कंपनी ने नॉन-प्रमोटर एंटिटीज से ₹5.75 करोड़ भी जुटाए हैं। फाइनेंशियल रीस्ट्रक्चरिंग का एक अहम हिस्सा नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) के साथ हुआ है, जहाँ ₹7.16 करोड़ के डेट को इक्विटी में बदला गया है। इस कदम से कंपनी का कर्ज कम होगा और उसकी फाइनेंशियल पोजीशन और मजबूत होगी।
इक्विटी और वारंट अलॉटमेंट का असर
कंपनी ने 6,93,999 इक्विटी शेयर और 9,539,449 कनवर्टिबल वारंट अलॉट किए हैं। इन सभी की कीमत ₹186 प्रति शेयर/वारंट तय की गई है, जिसमें इक्विटी शेयर्स के लिए ₹184 का प्रीमियम भी शामिल है। यह नया फंड कंपनी को ग्रोथ कैपिटल देगा और उसकी देनदारियों को मैनेज करने में मदद करेगा। शेयरधारकों के लिए, डेट को इक्विटी में बदलने से ब्याज का बोझ कम होगा, हालांकि इससे उनकी हिस्सेदारी थोड़ी कम ज़रूर होगी।
बड़े निवेशक की एंट्री
इस प्रीफरेंशियल इश्यू में एक बड़ा नाम मशहूर निवेशक विजय केडिया का भी है। वारंट अलॉटमेंट के बाद, केडिया और उनके एसोसिएट्स की कंपनी में हिस्सेदारी पूरी तरह कन्वर्ट होने पर लगभग 3% तक पहुंच जाएगी। बाजार की नज़र ऐसे बड़े निवेशकों पर रहती है, क्योंकि यह कंपनी के लॉन्ग-टर्म पोटेंशियल के बारे में उनके भरोसे को दिखाता है।
आगे का रास्ता
SPML Infra ऐसे सेक्टर में काम करती है जहाँ बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लगातार कैपिटल की ज़रूरत होती है। NARCL के ज़रिए डेट कम करना एक अच्छी बात है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन और कैश फ्लो पर नज़र रखनी होगी। यह देखना अहम होगा कि यह नया फंड कंपनी के ऑर्डर बुक को कैसे बढ़ाता है और अगले क्वार्टर में ऑपरेशनल परफॉरमेंस में क्या सुधार लाता है।
