Shapoorji Pallonji Group की कंपनी Mercury Finance ने **$125 मिलियन** जुटाने के लिए डॉलर बॉन्ड को री-इश्यू करने का फैसला किया है। इस फंड का इस्तेमाल Porteast Investment के **₹3,500 करोड़** के कर्ज को चुकाने के लिए किया जाएगा, जिसके लिए Tata Sons के शेयर को कोलैटरल बनाया गया है।
बॉन्ड के जरिए जुटाई जाएगी बड़ी पूंजी
Shapoorji Pallonji Group की इकाई Mercury Finance ने अपने मौजूदा डॉलर-डिनॉमिनेटेड बॉन्ड्स को फिर से जारी (Reissue) करने की योजना बनाई है। ये बॉन्ड्स जुलाई 2029 में मैच्योर होंगे। कंपनी ने इसमें एक 'ऑप्शनल रिडेम्पशन' क्लॉज भी रखा है, जिससे उन्हें 1 साल बाद बॉन्ड्स को वापस खरीदने का विकल्प मिलता है।
क्यों है यह फंड रेजिंग जरूरी?
इस फंड का मुख्य मकसद पोर्टइस्ट इन्वेस्टमेंट (Porteast Investment) की ₹3,500 करोड़ की देनदारी को सेटल करना है। यह भुगतान मूल रूप से मई 2025 में ड्यू था, जिसे अब 31 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ाने के लिए कंपनी ने औपचारिक आग्रह किया है।
यह कदम जुलाई में हुई उस एक्सरसाइज का विस्तार है, जब कंपनी ने $650 मिलियन जुटाए थे। इस बार भी टाटा संस में मौजूद ग्रुप की हिस्सेदारी को गिरवी रखकर यह फंड जुटाया जा रहा है।
क्या है आगे की राह?
ग्रुप की नजर अब अपने कर्ज के बोझ को कम करने पर है। टाटा ट्रस्ट्स की रिपोर्ट के अनुसार, SP ग्रुप टाटा संस में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहा है, जिसकी वैल्यू करीब ₹25,000 करोड़ आंकी गई है। निवेशकों की नजर अब इस संभावित सेल और कर्ज भुगतान के लिए मांगी गई डेडलाइन विस्तार पर टिकी है, क्योंकि यही ग्रुप की फाइनेंशियल हेल्थ का असली पैमाना तय करेगी।
