SK Finance में सेकेंडरी मार्केट के जरिए एक बड़ा सौदा हुआ है। Neo Secondaries Fund और Kenro Capital ने **₹400 करोड़** की हिस्सेदारी खरीदी है, जिससे TPG और Norwest Venture Partners को कंपनी से बाहर निकलने का मौका मिल गया है।
सेकेंडरी सेल से क्या बदला?
यह सौदा उस समय आया है जब जयपुर स्थित NBFC, SK Finance ने अपना प्रस्तावित ₹2,200 करोड़ का IPO पिछले साल टाल दिया था। IPO के उलट, इस सेकेंडरी ट्रांजेक्शन में कंपनी के पास कोई नया फंड नहीं आ रहा, बल्कि शेयर पुराने निवेशकों से नए निवेशकों के हाथों में जा रहे हैं। कंपनी मैनेजमेंट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वे वैल्यूएशन और मार्केट कंडीशंस को देखते हुए IPO के प्लान को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल रहे हैं।
फाइनेंशियल ग्रोथ पर नजर
भले ही लिस्टिंग का प्लान टला हो, लेकिन कंपनी की रफ्तार तेज है। 31 मार्च 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ने ₹431 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। वहीं, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹15,755 करोड़ तक पहुंच गया है। जून 2026 की तिमाही में कंपनी का एसेट बेस बढ़कर ₹16,227 करोड़ हो गया और तिमाही मुनाफा ₹104 करोड़ रहा है।
रिस्क और चुनौतियां
कंपनी अब केवल पुरानी गाड़ियों (Used-vehicle) के लोन तक सीमित नहीं है, बल्कि MSME लोन सेगमेंट में भी तेजी से पैर पसार रही है। 13 राज्यों में फैली कंपनी के लिए क्रेडिट रिस्क और कलेक्शन को मैनेज करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, RBI द्वारा एक मिडिल लेयर NBFC के तौर पर रेगुलेट होने के कारण, इन्हें कड़े नियमों का पालन करना होता है।
इंटरेस्ट रेट्स में उतार-चढ़ाव कंपनी के मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, कंपनी की AA- क्रेडिट रेटिंग इसकी मजबूत फाइनेंशियल स्थिति की ओर इशारा करती है, लेकिन भविष्य में लिस्टिंग के दोबारा संकेत ही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा 'लिक्विडिटी इवेंट' साबित होंगे।
