सरकारी ऋणदाता SIDBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में **₹5,493 करोड़** का अब तक का सबसे बड़ा नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। लोन बुक में **17%** की बढ़ोतरी और **जीरो** नेट NPA के साथ बैंक ने अपनी मजबूती साबित की है।
मुनाफे की रफ्तार और लोन ग्रोथ
SIDBI ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में बड़ी छलांग लगाते हुए ₹5,493 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट हासिल किया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें 14% की वृद्धि दर्ज की गई है। बैंक की इस ग्रोथ के पीछे मुख्य हाथ उसके क्रेडिट ऑपरेशंस का है, जहां कुल लोन और एडवांसेज 17% बढ़कर ₹5,79,755 करोड़ के स्तर पर पहुंच गए हैं। पिछले साल यह आंकड़ा ₹4,96,282 करोड़ था।
MSME सेक्टर के लिए अहम भूमिका
एक सरकारी डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन के तौर पर, SIDBI देश भर में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को क्रेडिट मुहैया कराने में बड़ी भूमिका निभाता है। बैंक की बैलेंस शीट का विस्तार होकर ₹6,32,378 करोड़ तक पहुंच जाना छोटे व्यवसायों तक पहुंच बनाने के इसके इरादे को साफ दिखाता है। साथ ही, मैनेजमेंट ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 20% डिविडेंड देने का भी एलान किया है।
एसेट क्वालिटी में मजबूती
लोन पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ाने के बावजूद, SIDBI ने अपनी एसेट क्वालिटी पर बेहतरीन नियंत्रण रखा है। 31 मार्च, 2026 तक बैंक का ग्रॉस NPA रेशियो महज 0.12% रहा। सबसे बड़ी बात यह है कि नेट NPA रेशियो जीरो पर है, जो दर्शाता है कि बैंक ने अपने बैड लोन्स को सफलतापूर्वक नाममात्र स्तर पर सीमित रखा है।
स्टेकहोल्डर्स के लिए क्या है मायने?
यह समझना जरूरी है कि SIDBI फिलहाल शेयर बाजार (NSE/BSE) पर लिस्टेड नहीं है, इसलिए इसके नतीजे रिटेल ट्रेडिंग के लिए नहीं, बल्कि देश के क्रेडिट इकोसिस्टम की सेहत को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। कमर्शियल बैंकों के विपरीत, SIDBI का प्राथमिक उद्देश्य मुनाफे को अधिकतम करना नहीं, बल्कि छोटी कंपनियों की स्केलेबिलिटी और कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाना है। भविष्य में, बैंक की चुनौती इस ग्रोथ को बनाए रखने और MSME सेक्टर में जोखिम को मैनेज करने की होगी।
