SIDBI और 28 Regional Rural Banks (RRBs) ने मिलकर एक को-लेंडिंग मॉडल लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में MSMEs को आसानी से लोन उपलब्ध कराना है। इस डिजिटल पहल से बैंकों को अपने लोन पोर्टफोलियो में विविधता लाने में मदद मिलेगी।
अब ग्रामीण भारत को मिलेगा आसान लोन
नई दिल्ली में हुए एक हालिया कॉन्क्लेव में SIDBI और 28 Regional Rural Banks (RRBs) ने अपने को-लेंडिंग फ्रेमवर्क का विस्तार करने का ऐलान किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में MSMEs तक औपचारिक क्रेडिट (Credit) की पहुंच बनाना है। इसके लिए 'SIDBI Co-Lending Origination Platform' को आधार बनाया गया है, जो लोन प्रोसेस को डिजिटल और ऑटोमेटेड बनाकर पेपरवर्क के झंझट को खत्म करेगा।
बैंकों की स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव
अब तक RRBs का पूरा ध्यान मुख्य रूप से कृषि लोन (Agricultural Lending) पर रहा है, जिससे सीजन और मानसून पर निर्भरता के कारण रिस्क ज्यादा रहता है। MSME क्षेत्र में कदम रखकर ये बैंक अपने लोन बुक को डायवर्सिफाई कर रहे हैं, जिससे उनका बिजनेस मॉडल पहले के मुकाबले अधिक स्थिर होने की उम्मीद है।
रिस्क मैनेजमेंट और चुनौतियां
इतनी बड़ी कवायद के बावजूद बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये बैंक एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को कैसे मैनेज करेंगे। छोटे स्तर के लोन में रिस्क ज्यादा होता है, जिसे कम करने के लिए सरकार ने 'रूल-बेस्ड अंडरराइटिंग' (Rule-based underwriting) पर जोर दिया है।
मजबूत वित्तीय आधार
इस को-लेंडिंग मॉडल के पीछे SIDBI की ताकत खड़ी है। संस्था ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में ₹5,493 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो इस बड़े ऑपरेशंस को सपोर्ट करने के लिए काफी मजबूत आधार है। हालांकि, असली परीक्षा RRBs के पुराने सिस्टम (Legacy systems) के साथ SIDBI के मॉडर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के तालमेल की होगी। आने वाली तिमाहियों में लोन डिस्बर्समेंट के आंकड़े और पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस ही इस मॉडल की सफलता तय करेंगे।
