NIM दबाव का सामना
बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव साफ दिख रहा है। मार्च 2026 को समाप्त पिछली चौथी तिमाही (Q4 FY26) में यह घटकर 2.95% रह गया, जबकि एक साल पहले यह 3.21% था। इस चुनौती से निपटने के लिए, South Indian Bank ने अपने लोन पोर्टफोलियो को री-बैलेंस करने का फैसला किया है। बैंक कॉर्पोरेट लोन से अपना एक्सपोजर 41% से घटाकर 38% कर रहा है और पर्सनल लोन का हिस्सा बढ़ाकर 29% करने की योजना है।
रिकॉर्ड प्रॉफिट, पर वजह अलग
हालिया Q4 FY26 में बैंक ने ₹408 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, यह शानदार आंकड़ा मुख्य रूप से प्रोविजन्स (जोखिम के लिए अलग रखी गई राशि) में 85% की बड़ी साल-दर-साल कमी के कारण आया है। इससे बैंक की कोर प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ रहे मार्जिन के दबाव पर पर्दा पड़ गया।
रिटेल और MSME की ओर बढ़ता कदम
बैंक का दीर्घकालिक लक्ष्य रिटेल/MSME और कॉर्पोरेट लेंडिंग के बीच लगभग बराबर का संतुलन बनाना है। इस रणनीति से बैंक अपने NIM को वापस 3.25% के स्तर तक ले जाने की कोशिश करेगा। इस पुश में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो, जो 45.62% बढ़कर ₹24,729 करोड़ तक पहुंच गया है, अहम भूमिका निभाएगा। हालांकि, सोने की कीमतों की अस्थिरता इस सेगमेंट में एक जोखिम बनी हुई है।
वैल्यूएशन में डिस्काउंट, एनालिस्ट्स का 'Buy'
बाजार विश्लेषकों (Analysts) के बीच South Indian Bank को लेकर राय सकारात्मक है। इसे 'Buy' रेटिंग मिली हुई है और टारगेट प्राइस ₹47.50 रखा गया है, जो इसके मौजूदा ₹40.02 के स्तर से लगभग 18% ऊपर है। वैल्यूएशन के लिहाज़ से, बैंक अपने मुकाबले Federal Bank (P/E ~16.6) और City Union Bank (P/E ~14.5) जैसे बैंकों की तुलना में काफी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है। बैंक का ट्रेलिंग बारह महीने का P/E रेश्यो लगभग 7.2 है, जबकि भारतीय बैंकिंग सेक्टर का औसत P/E 12.8 के आसपास है।
चुनौतियां: भू-राजनीतिक तनाव और CEO का जाना
इन सकारात्मक पहलुओं के बावजूद, बैंक के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical risks) एसेट क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर MSME और रिटेल सेगमेंट में। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इन बाहरी दबावों के कारण FY27 में NPA स्लिपेज 1.5% तक बढ़ सकता है।
इसके अलावा, बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, P.R. Seshadri, सितंबर 2026 में पद छोड़ने वाले हैं। नेतृत्व में यह बदलाव अनिश्चितता पैदा कर सकता है। एक और ध्यान देने वाली बात यह है कि कर्मचारी खर्चों में एक बार की कमी एक्चुअरल राइट-बैक के कारण हुई है, जो भविष्य में जारी नहीं रह सकती और लागत बढ़ा सकती है।
भविष्य की राह
बैंक का मुख्य लक्ष्य अपनी रिटेल और MSME ग्रोथ रणनीति को सफलतापूर्वक लागू करना है ताकि NIM को 3.00%-3.25% की रेंज में वापस लाया जा सके। मैनेजमेंट का मानना है कि बाहरी कारकों के चलते एसेट क्वालिटी में मामूली गिरावट संभव है। कुल मिलाकर, एनालिस्ट्स का 'Buy' आउटलुक है, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों और लीडरशिप बदलाव को सफलतापूर्वक संभालने की बैंक की क्षमता उसके भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण होगी।
